“मंदिर के अंदर बैठे हैं टोटी चोर”… स्वामी करपात्री महाराज का बड़ा बयान…

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर स्वामी करपात्री महाराज ने बेहद चौंकाने वाले दावे किए हैं। महाराज का कहना है कि महासचिव चंपत राय का इस्तीफा मंजूर हो चुका है और पूछताछ में उन्होंने कई बड़े राज उगले हैं। उन्होंने मंदिर से चांदी की टोटी चोरी होने, वारदात के समय कैमरे बंद किए जाने का आरोप लगाते हुए कारसेवक पुरम की तलाशी और ट्रस्टी अनिल मिश्रा व गोपाल राव की संपत्तियों की जांच की मांग की है।

अयोध्या: रामलला की पावन नगरी अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर चल रहा विवाद अब अपने सबसे विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। बता दें, प्रख्यात संत स्वामी करपात्री महाराज ने मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों को कटघरे में खड़ा करते हुए ऐसे सनसनीखेज दावे किए हैं, जिससे पूरे देश के धार्मिक और राजनीतिक हलकों में भूकंप आ गया है। महाराज ने साफ शब्दों में एलान किया है कि विवादों में घिरे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा अंदरखाने मंजूर किया जा चुका है और वे इस वक्त जांच के दायरे में हैं।

‘चांदी की टोटी चोरी हुई, वारदात के वक्त बंद किए जाते थे कैमरे’
करपात्री महाराज ने सीधे मंदिर परिसर के भीतर संगठित रूप से हो रही चोरी का आरोप लगाते हुए कहा, “राम मंदिर के अंदर ही बड़े-बड़े टोटी चोर बैठे हुए हैं। प्रभु के धाम से चांदी की बेहद कीमती टोटी चोरी होने का मामला सामने आया है।” उन्होंने एक और बेहद गंभीर तकनीकी मिलीभगत का पर्दाफाश करते हुए दावा किया कि मंदिर परिसर में जिन-जिन जगहों पर ऐसी चोरियां या वित्तीय हेराफेरी को अंजाम दिया जाता था, योजनाबद्ध तरीके से ठीक उसी वक्त वहां के सीसीटीवी कैमरे बंद करा दिए जाते थे। उन्होंने इस पूरे प्रकरण में अर्जुन देव की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी पूछताछ की मांग की है।

कारसेवक पुरम की तलाशी और बड़े ट्रस्टियों पर संगीन आरोप
बता दें, महाराज ने मांग की है कि सच को सामने लाने के लिए अयोध्या स्थित ‘कारसेवक पुरम’ परिसर की तुरंत सघन तलाशी ली जानी चाहिए और कड़ाई से जांच होनी चाहिए। उन्होंने चंपत राय को लेकर कहा, “चंपत राय को किसी भी कीमत पर अभी अयोध्या से बाहर नहीं जाने देना चाहिए। शुरुआती पूछताछ में उन्होंने कई बड़े और रसूखदार लोगों के राज उजागर किए हैं।”

इसके साथ ही उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी की भूमिका को भी पूरी तरह संदिग्ध बताया। महाराज ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट से जुड़े गोपाल राव ने कर्नाटक में बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी हैं, जिसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने एक अन्य स्थानीय ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का नाम लेते हुए सरकार से मांग की है कि उनके कार्यकाल के दौरान अर्जित की गई समस्त चल-अचल संपत्तियों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। संतों के इन तीखे आरोपों ने अब राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे की पारदर्शिता पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

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