
हैदराबाद। तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार ने हैदराबाद में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (यूएस कांसुलेट जनरल) के पास स्थित एक महत्वपूर्ण सड़क का नाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’ रखने का निर्णय लिया है। इसका औपचारिक नामकरण समारोह 23 जून को आयोजित किया जाएगा।
ट्रंप का हैदराबाद से कोई सीधा नाता नहीं
इस फैसले पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप का हैदराबाद या तेलंगाना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा है और न ही वे कभी यहाँ आए हैं। ऐसे में उनके नाम पर सड़क का नामकरण किए जाने के पीछे सरकार की मंशा क्या है, इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी?
यह मामला कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी के लिए बेहद असहज स्थिति पैदा कर सकता है। राहुल गांधी लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं और केंद्र की मोदी सरकार को ट्रंप से अत्यधिक नज़दीकी को लेकर घेरते रहे हैं। लेकिन अब उनकी अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार ट्रंप को असाधारण सम्मान दे रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह फैसला राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान की सहमति से लिया गया है?
तेलुगु समाज और सियासी हलकों में चर्चा तेज़
तेलुगु समाज और राजनीतिक गलियारों में इस बात पर गहन चर्चा हो रही है कि आखिर ट्रंप का भारत या तेलंगाना के लिए ऐसा क्या योगदान रहा है, जिसके आधार पर यह नामकरण किया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी लगातार ऐसे काम कर रहे हैं, जिससे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी को बार-बार फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस में यह दोहरा चरित्र क्यों? एक ओर जहाँ राष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप की कड़ी आलोचना हो रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य स्तर पर उनके नाम पर सड़क का नामकरण कर सम्मानित किया जा रहा है। इस विरोधाभास ने पार्टी की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।









