
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नए पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति में एक और अड़चन सामने आई है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राज्य सरकार की ओर से भेजी गई अधिकारियों के नाम की सूची को प्रक्रियागत देरी का हवाला देते हुए लौटा दिया है और उच्चतम न्यायालय से उचित निर्देश प्राप्त करने की सलाह दी है। इस संबंध में जानकारी एक अधिकारी ने मंगलवार को दी।
यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब मौजूदा डीजीपी राजीव कुमार का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है और राज्य में कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “राज्य सरकार ने नए डीजीपी या पुलिस प्रमुख के चयन के लिए एक एम्पैनलमेंट कमेटी मीटिंग (ECM) का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन UPSC ने इस प्रस्ताव को लौटा दिया और प्रक्रिया में गड़बड़ी और नामों की सूची में देरी का हवाला दिया।”
31 दिसंबर को यूपीएससी के निदेशक (एआईएस) नंद किशोर कुमार द्वारा राज्य के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में 2018 में हुए प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले का उल्लेख किया गया है। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि सभी राज्यों को मौजूदा डीजीपी की सेवानिवृत्ति से कम से कम तीन महीने पहले यूपीएससी को अपनी सूची भेजनी होगी ताकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और मेरिट आधारित हो सके।
यूपीएससी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में डीजीपी के पद की रिक्ति 28 दिसंबर 2023 को मनोज मालवीय के सेवानिवृत्त होने के बाद हुई थी, जिसके बाद राजीव कुमार को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था।
डीजीपी की नियुक्ति से संबंधित तय नियमों के मुताबिक, राज्य सरकार को यूपीएससी द्वारा चयनित अधिकारियों की सूची से एक अधिकारी को चुनना होता है। राज्य सरकार को अपनी सूची समय सीमा के भीतर समिति को भेजनी होती है।
अधिकारी ने बताया कि यूपीएससी ने राज्य सरकार को सूचित किया है कि पिछली नियुक्ति में गड़बड़ियों के कारण वह किसी को भी मौजूदा डीजीपी के रूप में नियुक्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, “तकनीकी रूप से, मनोज मालवीय राज्य के अंतिम स्थायी डीजीपी बने हुए हैं।”
अधिकारी के मुताबिक, चूंकि पिछले स्थायी डीजीपी का कार्यकाल दिसंबर 2023 में समाप्त हो गया था, इसलिए अधिकारियों की सूची सितंबर 2023 तक भेज दी जानी चाहिए थी।









