
मेरठ। चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मेरठ की जिला अदालत ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को बड़ा फैसला सुनाया। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी करार दिया। दोनों के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े आरोपों में अदालत ने दोषसिद्धि की है। सजा के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रखा गया है।
126 पेशियां और 22 गवाहों के बाद आया फैसला
इस चर्चित मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली। रिपोर्टों के मुताबिक मुकदमे में करीब 126 पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने 30 सितंबर को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी
सुरक्षा कारणों के चलते जेल में बंद मुस्कान रस्तोगी और साहिल की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी कराई गई। फैसले को लेकर मेरठ जिला अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
अभियोजन ने साजिश रचकर हत्या का लगाया था आरोप
अभियोजन के अनुसार, सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ स्थित अपने घर लौटे थे। आरोप था कि उनके लौटने के बाद मुस्कान और साहिल के बीच संबंधों में सौरभ बाधा बन रहे थे। अभियोजन ने दावा किया कि इसी वजह से दोनों ने हत्या की साजिश रची।
अभियोजन के मुताबिक, 3 मार्च 2025 की रात सौरभ के खाने में नशीली दवा मिलाई गई। उनके बेसुध होने के बाद साहिल को घर बुलाया गया और धारदार हथियार से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई।
नीले ड्रम में शव छिपाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्य मिटाने के लिए उसके टुकड़े किए गए। इसके बाद शव के टुकड़ों को पॉलीथीन में लपेटकर एक बड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा गया और सीमेंट के घोल से सील किया गया। यही वजह रही कि यह मामला बाद में ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चित हुआ।
परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर टिका था अभियोजन
मामले में प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने का तर्क बचाव पक्ष की ओर से दिया गया था। वहीं अभियोजन ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच से जुड़े तथ्यों को भी सुनवाई के दौरान पेश किया गया।
फैसले के बाद अब सजा पर होगी सुनवाई
अदालत द्वारा मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी करार दिए जाने के बाद अब अगली सुनवाई में सजा के बिंदु पर फैसला होगा। यानी अदालत ने अभी सजा की अवधि या प्रकृति का अंतिम आदेश नहीं सुनाया है।
क्या कहा अदालत ने?
फैसला सुनाते समय अदालत की ओर से अपराध के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर टिप्पणी किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, सुनवाई के दौरान मुस्कान से अदालत की ओर से सवाल किए जाने और उसके जवाब देने की जानकारी भी सामने आई है। इन बयानों के संबंध में विस्तृत आधिकारिक आदेश सामने आने के बाद ही अंतिम रूप से उद्धृत किया जाना उचित होगा।









