किसानों की हितैषी है योगी सरकार, किसानों के विरोध का नहीं है कोई औचित्य – स्वामी प्रसाद मौर्य

कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने शनिवार को कहा कि किसान बिल वापस हो गया है और अब किसानों के विरोध करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि किसान सदैव हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में से रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली ऐसी सरकार है जिन्होंने पहली अपनी कैबिनेट बैठक में छियासी लाख किसानों का ऋण माफ करने का निर्णय लिया था।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने किसानों के मुद्दे पर बोलते हुए कहा आगे कहा कि जब से प्रधानमंत्री मोदी की सरकार बनी है, समय-समय पर नियमित रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जा रहा है। क्रय केंद्रों के माध्यम से किसानों के उपज की खरीद भी नियमित और सुचारु रूप से हो रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों की तुलना में हमारी सरकार में 5 गुना से ज्यादा खरीद हुई है।

किसान सम्मान निधि की उपलब्धि बताते हुए स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार पहली ऐसी सरकार है जो किसानों के सम्मान में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की हर चौथे महीने में दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता उसके बैंक खाते में भेज रही है।

कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल में मात्र 15 हजार करोड़ रूपया गन्ना किसानों को भुगतान किया था। हमारी सरकार ने साढ़े 4 साल के भीतर एक लाख 45 हजार करोड़ पर गन्ना किसानों का भुगतान किया। यह पहली ऐसी सरकार है जो देश के 80 करोड़ लोगों को लोगों निःशुल्क खाद्यान्न मुहैया करा रही है।

गठबंधन के सवाल पर बोलते हुए मौर्या ने कहा कि क्या छोटे दल और बड़े दल कभी एक हुए हैं। पार्लियामेंट के चुनाव में सपा-बसपा भी एक हुए थे। ये दोनों पार्टियां एक होकर भी बीजेपी का पीछा नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि सपा-बसपा जैसे बड़े क्षेत्रीय दल भाजपा को रोकने में पूरी तरह से असफल रहे और धराशाई हो गए। गठबंधन बेअसर रहा, चुनाव के बाद गठबंधन टूट गया तो अब छोटे दलों का क्या मतलब है?

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