धनश्याम कि मेहनत से महकी नूरजहाँ कि खुशबू, 500 पेड़ों से कि थी शुरूवात

मन में कुछ करने कि इच्छा हो तो तरक्की उसके कदम चुमती है, ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, सीमी नरगोल गांव के 68 वर्षीय बुजुर्ग ग्रामीण किसान धनश्याम पांडे और उनकी पत्नी दीपा पांडे ने।

मन में कुछ करने कि इच्छा हो तो तरक्की उसके कदम चुमती है, ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, सीमी नरगोल गांव के 68 वर्षीय बुजुर्ग ग्रामीण किसान धनश्याम पांडे और उनकी पत्नी दीपा पांडे ने। दोनो किसान दम्पति ने हाड़तोड मेहनत कर 15 नाली भूमि में नूरजहां गुलाब प्रजाति का बगीचा तैयार किया गया है, 2008 में कुछ एक पोधे से शुरू हुये बगीचे मे आज हजारों गुलाब के फूल खिल रहे है।

इन फूलों से धनश्याम गुलाब जल बनाते है, धनश्याम पांडे बताते है, आज से 14 साल पहले बड़े भाई के०वी० पांडे से गुलाब के खेती कि प्रेरणा मिली। धनश्याम ने गरूड़ क्षेत्र से नूरजहाँ प्रजाति के 500 पेड़ों से शुरूवात कि थी, आज हजारों गुलाब के पेड़ व फूल लहलहा रहे है, गुलाब के फूलों से प्रतिवर्ष 400 लीटर गुलाब जल तैयार किया जाता है, बाजार के अभाव के कारण 200 रूपये प्रति लीटर के हिसाब से गुलाब जल बिकता है।

उद्यान विभाग, और उद्योग विभाग, यदि गांव के उद्यमियों को बाजार उपलब्ध कराये तो अन्य किसान गुलाब कि खेती के लिए न केवल प्रेरित होगे, बल्कि इससे लाभान्वित भी हो सकते है, हर साल अप्रैल माह अन्त तक गुलाब कि पंखुड़ियों को तोड़ कर उन्हें भड्डी में उबाला जाता है, उससे निकलने वाले वाष्प से गुलाब जल तैयार होता है, तैयार गुलाब जल को गेलन मे भर कर मांग कि मुताबिक बाजार में बेचा जाता है।

उद्यमी किसान धनश्याम पाड़े बताते है, कि बना बनाया गुलाब जल का उघोग सरकारों कि उदासीनता के कारण खत्म हो रहा है, जिला प्रशासन बागेश्वर से बहुत बार बात हो चुकी है, कहि से कहि तक हमारी सुध लेने वाला कोई नही है, दोनो ग्रामीण किसान दम्पति ने सरकार से गुलाब जल खरीदने कि अपील कि है।

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