
दुनिया भर के कई देशों में इन दिनों संघर्ष और युद्ध की स्थिति बनी हुई है। हाल ही में इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें अमेरिका ने इजरायल का समर्थन किया। रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष पिछले कई वर्षों से चल रहा है। वहीं, भारत और पाकिस्तान के बीच भी एक संघर्ष हुआ है।
बता दें, आजकल दुनिया भर में डिफेंस सेक्टर में भारी निवेश किया जा रहा है, जबकि कई देश भूखमरी और बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद, हथियारों की खरीद पर खर्च बढ़ता ही जा रहा है। युद्ध की सबसे पहली शर्त ही यही है कि इसमें भारी मात्रा में पैसा लगाया जाता है।
बता दें, रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक का यह दसवां साल है जब दुनिया भर में मिलिट्री बजट में लगातार वृद्धि देखी गई है। युद्धों की भयावहता इतनी बढ़ गई कि वैश्विक रक्षा खर्च का बोझ 2.5% तक पहुंच गया, और जिन देशों में संघर्ष हो रहा था, वहां यह आंकड़ा 4.4% तक पहुंच गया।
वहीं, 2024 का साल वैश्विक सुरक्षा के लिए एक भयावह साल बनकर सामने आया है। 2023 के मुकाबले, 2024 में हथियारों पर खर्च रिकॉर्ड $2.7 ट्रिलियन तक पहुंच चुका है, जो पिछले साल से 9.4% ज्यादा है। इसके साथ ही, मौतों का आंकड़ा भी भयावह तस्वीर पेश करता है। पिछले साल 239,000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। गाजा और यूक्रेन की जंग, म्यांमार और सूडान में सिविल वॉर और इथियोपिया में युद्ध में 10,000 से अधिक मौतें हुईं। 2023 में जहां दुनिया भर में चार बड़े युद्ध चल रहे थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
बता दें, हथियारों पर खर्च करने में यूरोप ने 83% की बढ़ोतरी दर्ज की है, जबकि एशिया-ओशिआना में यह बढ़ोतरी 46% रही। अमेरिका और पश्चिमी एशिया में 19% और अफ्रीका में 11% की बढ़ोतरी हुई है। 1988 से 2024 तक के आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि अमेरिका सबसे आगे रहा है, लेकिन एशिया-ओशिआना ने इस क्षेत्र में कड़ी टक्कर दी है।
वहीं, इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि जंग के मैदान में शांति की उम्मीद कम होती जा रही है। जो देश युद्धों से बचते हैं, उनके लिए डिफेंस पर खर्च सिर्फ 1.9% रहा है, लेकिन जो देश संघर्षों में उलझे हुए हैं, उन्होंने अपनी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हथियारों पर खर्च किया है। 2015 से 2024 के बीच वैश्विक सैन्य खर्च में 37% की वृद्धि हुई है।
बता दें, भारत भी डिफेंस पर खर्च करने में पीछे नहीं है। पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे आतंकवादी हमलों और सैन्य धमकियों को देखते हुए भारत ने भी अपने सैन्य साजो-सामान पर खर्च किया है। 2024 में भारत का मिलिट्री बजट 83.6 बिलियन डॉलर हो गया है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस खर्च करने वाले देशों में पांचवे स्थान पर ले आता है। अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी के बाद भारत का नाम आता है। 2020 से 2024 के बीच भारत का वैश्विक आर्म्स इम्पोर्ट 8.3% था। भारत इस दौरान यूक्रेन के बाद सबसे बड़ा आयातक देश बनकर उभरा है।
वहीं, 1956 से लेकर 2024 तक भारत का रक्षा खर्च 2941 मिलियन डॉलर से बढ़कर 83,623.1 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इस दौरान भारत की न्यूक्लियर ताकत में भी वृद्धि हुई है और इसके वारहेड्स की संख्या 172 से बढ़कर 180 हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर हर कदम बेहद मजबूती और सतर्कता से उठा रहा है।









