ये हैं साल 2021 के कुछ चर्चित मामले जिनपर शीर्ष अदालत ने दिए ‘सुप्रीम’ फैसले, जानिये, साल 2021 का हर बड़ा मामला

1) बिकरू कांडः विकास दुबे की पत्नी पर दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया

गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी ऋचा दुबे ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी,जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।कोर्ट ने कहा कि सरेंडर के बाद ऋचा जमानत याचिका दाखिल करती हैं तो उस पर कानून के मुताबिक सुनवाई होगी। ऋचा दुबे की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि मामले में जब चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है तो फिर FIR रद्द करने की मांग कैसे कर सकती हैं। ऋचा ने अपने खिलाफ धोखाधड़ी की FIR रद्द करने की मांग की थी। 9 नवंबर 2020 को फर्जी नाम से सिम कार्ड लेने को लेकर रिचा दुबे पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धारा 419 और 420 के तहत दर्ज मामले में FIR रद्द करने से इनकार कर दिया था।

2) मनीष गुप्ता हत्याकांडः ट्रायल को यूपी से दिल्ली ट्रांसफर का सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या के मामले में ट्रायल को यूपी से बाहर दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश दिया। मनीष गुप्ता की हत्या के मामले में ट्रायल दिल्ली की CBI कोर्ट में चलेगा। सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने भी इस पर सहमति जताई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया घटना के अगले ही दिन मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश कर दी गई थी. सीबीआई ने 3 नवंबर से जांच शुरू कर दी है. दोषी पुलिसवालों को निलंबित कर दिया गया है. आरोपियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। मृतक कारोबारी की पत्नी को सरकारी नौकरी भी दी गई है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या के मामले में ट्रायल को यूपी से बाहर ट्रांसफर करने और हत्या की CBI जांच की मांग को लेकर मनीष गुप्ता की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई थी।

3) लखीमपर हिंसाः SC ने हाई कोर्ट के पूर्व जज राकेश जैन को सौंपी जांच की निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर हिंसा केस में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस राकेश कुमार जैन को मामले की जांच की निगरानी के लिए नियुक्त किया है। कोर्ट ने कहा निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है। इसके अलावा कोर्ट ने मामले की जांच कर रही एसआईटी में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को भी शामिल करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिटायर्ड जस्टिस जैन यह सुनिश्चित करेंगे कि मामले की जांच निष्पक्षता से हो सके। केस में चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट दोबारा इस मामले की सुनवाई करेगा। मामले की सुनवाई के दौरान यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने 15 नवंबर को कोर्ट के सुजगव पर राज्य सरकार की तरफ से सहमति जताई थी। चीफ जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने जांच की निगरानी रिटायर्ड जज को सौंपने के साथ ही SIT में भी बदलाव किया। वरिष्ठ IPC अधिकारियों एस पी शिरोडकर, प्रीतिंदर सिंह और पद्मजा चौहान को भी SIT में शामिल किया गया है। पिछली सुनवाई में ही कोर्ट ने संकेत दिया था कि SIT में सिर्फ लखीमपुर के आस-पास तैनात जूनियर अधिकारियों का होना सही नहीं है. कोर्ट ने मूल रूप से यूपी के न रहने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम पर राज्य सरकार से सुझाव मांगा था।

4) सुप्रीम कोर्ट ने बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को पंजाब जेल से उत्तर प्रदेश शिफ्ट करने का आदेश दिया


सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब की रोपड़ जेल में बंद बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को दो हफ्ते में उत्तर प्रदेश की जेल में शिफ्ट किया जाएगा. मुख्तार अंसारी के मुकदमे और उसकी कस्टडी ट्रांसफर की याचिका पर शुक्रवार को फैसला सुनाया. पंजाब सरकार की दलीलों से कोर्ट संतुष्ट नहीं था. पंजाब सरकार को झटका देते हुए कोर्ट ने मुख्तार को शिफ्ट करने का आदेश दिया.

जस्टिस अशोक भूषण और आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने निर्देश दिया कि अंसारी को दो हफ्ते के अंदर मुख्तार को यूपी शिफ्ट करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये विशेष कोर्ट तय करेगी कि अंसारी को इलाहाबाद या बांदा किस जेल में शिफ्ट किया जाए।

मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि उनका पंजाब राज्य द्वारा मुखर रूप से बचाव किया गया है। पंजाब राज्य एक आतंकवादी का समर्थन कर रहा है। यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बसपा विधायक मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल से उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में स्थानांतरित करने की मांग की थी. याचिका में कहा था कि मुख्तार अंसारी के खिलाफ यूपी की विभिन्न अदालतों में 50 मुकदमे दर्ज हैं। याचिका में आरोप लगाया कि वर्तमान में मुख्तार अंसारी के खिलाफ यूपी में कई गंभीर अपराधिक मामले दर्ज हैं, इस कारण उसका यूपी की जेल में ट्रांसफर करना महत्वपूर्ण है। मुख्तार अंसारी के वकील मुकुल रोहतगी ने सुनवाई के दौरान कहा था कि विपक्ष की एक पार्टी से जुड़े होने के कारण अंसारी को निशाना बनाया जा रहा है यूपी सरकार राजनीतिक द्वेष के चलते इस मामले को चला रही है। अंसारी ने यह भी दावा किया कि उन्हें यूपी में जान का खतरा है।

5) UP पंचायत चुनाव: आरक्षण का आधार वर्ष 2015 को बनाए जाने के खिलाफ सुनवाई से SC का इनकार

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ी राहत देते हुए कोर्ट ने याचिका पर दखल देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले हाई कोर्ट जाए। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पुरानी आरक्षण सूची पर रोक लगाते हुए 2015 के आधार पर चुनाव कराने को लेकर फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि साल 2015 को आधार मानते हुए सीटों पर आरक्षण लागू किया जाए। हाई कोर्ट में राज्य सरकार ने कहा कि वह साल 2015 को आधार मानकर आरक्षण व्यवस्था लागू करने के लिए तैयार है। सुप्रीम कोर्ट याचिका दाखिल कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान उसका पक्ष पूरी तरह नहीं सुना गया।

6) यूपी पंचायत चुनाव की मतगणना को SC ने दी इजाजत, जीत के बाद जश्न पर लगाई रोक

कोरोना के मद्देनजर यूपी में पंचायत चुनाव की मतगणना रोकने की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुवनाते हुए यूपी पंचायत चुनाव की मतगणना कराने की इजाजत दी थी।सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही लेकिन जीत के बाद जश्न पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो प्रोटोकॉल हमारे सामने रखा गया, उसका पूरी तरह पालन हो। मतगणना केंद्र के बाहर सख्त कर्फ्यू हो और कोई विजय रैली न निकाली जाए। हर मतगणना केंद्र पर एंटीजन टेस्ट का इंतजाम रहेगा। मतगणना केंद्र पर सैनिटाइजेशन का भी ध्यान रखा जाएगा।

7) यूपी में दर्ज FIR पर AAP सांसद संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत

यूपी में जातीय वैमनस्य फैलाने के मामले में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को आज सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण और आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह से कहा कि आप सांसद हैं। आपको इस तरह के बयान नहीं देना चाहिए था। आप लिमिट लिमिट क्रॉस करेंगे तो कानून के मुताबिक आपके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। सुप्रीम कोर्ट की आप सांसद संजय सिंह को नसीहत देते हुए कहा आप धर्म और जाति के आधार पर समाज को नहीं बांट सकते हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, संत कबीरनगर, लखीमपुर खीरी, बागपत, मुजफ्फरनगर, बस्ती और अलीगढ़ समेत कई जिलों में कुल 14 एफआईआर संजय सिंह के ऊपर दर्ज हुईं थी।समाज में द्वेष फैलाने के अलावा कुछ एफआईआर में उनके ऊपर राजद्रोह की भी धारा लगाई थी। संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी गिरफ्तारी पर रोक की मांग के साथ सभी एफआईआर को एक साथ जोड़े जाने के अलावा मुकदमा रद्द करने की भी दरख्वास्त की थी।

8) सुपरटेक के 40 मंजिला ट्विन टॉवर्स को गिराने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुपरटेक एमेराल्ड केस में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए सुपरटेक के 40 मंजिला ट्विन टॉवर्स को गिराने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह टॉवर नोएडा अथॉरिटी और सुपटेक की मिलीभगत से बने थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि सुपरटेक अपने ही पैसों से इनको तीन महीने के अंदर-अंदर तोड़े साथ ही खरीददारों की रकम ब्याज समेत लौटाए।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था नोएडा एक भ्रष्ट निकाय है। इसकी आंख, नाक, कान और यहां तक कि चेहरे तक से भ्रष्टाचार टपकता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2014 में एमराल्ड कोर्ट ओनर रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए एपेक्स और सियान टावरों को गलत ठहराते हुए ढहाने का आदेश दिया था।इलाहाबाद HC के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

9) यूपी के 5 शहरों में नहीं लॉकडाउन लगाने के इलाहाबाद HC के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई

उत्तर प्रदेश के पांच शहरों (लखनऊ, वाराणसी, कानपुरनगर, प्रयागराज और गोरखपुर) में लॉकडाउन लगाने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई। भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई। इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। यूपी सरकार की ओर से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि हमने कोरोना कंट्रोल करने के लिए कई कदम उठाए हैं, कुछ और कदम उठाने हैं, लेकिन लॉकडाउन इसका हल नहीं है।

उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रदेश में कोरोना के मामले बढ़े हैं और सख्ती कोरोना के नियंत्रण के लिए आवश्यक है, सरकार ने कई कदम उठाए हैं और आगे भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, जीवन बचाने के साथ गरीबों की आजीविका भी बचानी है, ऐसे में शहरों में संपूर्ण लॉकडाउन अभी नहीं लगेगा।

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