केंद्र सरकार की इस परियोजना को मिली कैबिनेट से मंजूरी, शुन्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य होगा हांसिल!

इस परियोजना के तहत सात राज्यों का चयन किया गया है जिनमें गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। केंद्र की यह परियोजना चरण दर चरण आगे बढ़ाई जायेगी।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बीते गुरुवार को घोषणा की कि हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के दूसरे चरण को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि केंद्र परियोजना की लागत के 33 प्रतिशत पर सहायता प्रदान करेगा, जिसका उद्देश्य पांच वर्षों की अवधि में सात राज्यों में लगभग 20GW अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के ग्रिड एकीकरण और बिजली निकासी की सुविधा प्रदान करना है।

हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की शुन्य उत्सर्जन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में यह एक बेहद अहम पहल है जिसके तहत 12,031 करोड़ रुपये की परियोजना से लगभग 10,750 सर्किट किमी ट्रांसमिशन लाइनें जुड़ जाएंगी और विद्युत सबस्टेशनों की क्षमता लगभग 27,500 मेगा वोल्ट-एम्पीयर तक बढ़ जाएगी।

इस परियोजना के तहत सात राज्यों का चयन किया गया है जिनमें गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। केंद्र की यह परियोजना चरण दर चरण आगे बढ़ाई जायेगी। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह योजना 2030 तक 450 GW स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी। इसके अलावा, ग्रीन कॉरिडोर देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देगा और कार्बन फुटप्रिंट को कम करके पारिस्थितिक रूप से स्थायी विकास को बढ़ावा देगा।

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