ऐसा रहा पद्म श्री तुलसी गौड़ा के 60 सालों का सफर, 12 साल की उम्र से ही कर रही हैं पर्यावरण की सेवा

पद्म पुरस्कारों के वितरण समारोह पर यह बात चर्चा में रही है कि वर्तमान बीजेपी सरकार पद्म पुरस्कारों या किसी भी सम्मानित अवार्ड के लिए उसके उचित हकदार को नामित करती है, और यह बात सही भी है। तुलसी गौड़ा को पद्म श्री जैसा उत्कृष्ट पुरस्कार मिलना समाज के उन सभी गरीब और वंचित लोगों के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है जिन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है या दे रहे हैं।

कर्नाटक की 72 वर्षीय आदिवासी महिला तुलसी गौड़ा को पर्यावरण की सुरक्षा में उनके योगदान के लिए सोमवार को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नंगे पांव और पारंपरिक पोशाक पहने हुए उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘पद्मश्री’ प्राप्त किया।

कर्नाटक में हलक्की जनजाति से ताल्लुक रखने वाली तुलसी गौड़ा एक गरीब और वंचित परिवार में पली-बढ़ीं। उन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की है। तुलसी गौड़ा का पौधों और जड़ी-बूटियों की विविध प्रजातियों का विशाल ज्ञान उन्हें ‘वनों का विश्वकोश’ उपनाम से एक अलग पहचान दिलाता है। 12 साल की उम्र से ही उन्होंने हजारों पेड़ लगाए और उनका पालन-पोषण किया। तुलसी गौड़ा एक अस्थायी स्वयंसेवक के रूप में वन विभाग में भी शामिल हुईं, जहां उन्हें प्रकृति संरक्षण के प्रति समर्पण की प्रतिमूर्ति के रूप में जाना गया। उनके इस सराहनीय कार्य के लिहाजा बाद में उन्हें विभाग में स्थायी नौकरी की पेशकश भी की गई थी।

आज, 72 साल की उम्र में भी, तुलसी गौड़ा पर्यावरण संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देने के लिए पौधों का पोषण करना और युवा पीढ़ी के साथ अपने विशाल ज्ञान को साझा करना जारी रखती हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में नामित लोगों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। पद्म पुरस्कारों की 2021 की सूची में सात पद्म विभूषण, 10 पद्म भूषण और 102 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं, जिनमें से 29 पुरस्कार विजेता महिलाएं हैं और एक पुरस्कार विजेता एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति है।

दरअसल, पद्म पुरस्कारों के वितरण समारोह पर यह बात चर्चा में रही है कि वर्तमान बीजेपी सरकार पद्म पुरस्कारों या किसी भी सम्मानित अवार्ड के लिए उसके उचित हकदार को नामित करती है, और यह बात सही भी है। तुलसी गौड़ा को पद्म श्री जैसा उत्कृष्ट पुरस्कार मिलना समाज के उन सभी गरीब और वंचित लोगों के लिए प्रेरणा का एक स्रोत है जिन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है या दे रहे हैं।

इसी बात को इंगित करते हुए तुलसी गौड़ा को मिले पद्म पुरस्कार पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने सोशल मीडिया साइट कू पर उनकी समारोह की एक तस्वीर सांझा करते हुए लिखा कि ”वर्तमान #PadmaAwards को परिभाषित करने का सटीक तरीका।”

बता दें कि पद्म पुरस्कार कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामलों, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल, सिविल सेवा आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रदान किए गए हैं।

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