
वाराणसी। आजादी क्या होता है यह भारत के लोग जानते है, लेकिन हम जैसे लोग नहीं जानते, जो अपने माता पिता के घर नहीं जा सकते। हमारे नौजवान ही हमारी आशा की किरण है, यह बाते तिब्बत की रक्षा मंत्री डोल्मा गायरी ने वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में भावुक होकर मंच से संबोधन में कहा। वाराणसी के कबीर मठ में आयोजित कैलाश मानसरोवर और तिब्बत संबंध का वैश्विक परिदृश्य संगोष्ठी में शामिल होने के लिए पहुंची तिब्बत की रक्षा मंत्री डोल्मा डायरी ने तिब्बत की मौजूदा स्थिति और भारत के साथ सम्बन्ध के साथ तिब्बतियों के दर्द के साथ वहां के युवाओं की भावनाओं को बताया।



स्वतंत्रता क्या होता है, यह हम जैसे लोग जिनका देश नहीं है वह समझ सकते है : तिब्बत रक्षा मंत्री
वाराणसी में तिब्बत की रक्षा मंत्री डोल्मा गायरी ने कैल्शा मानसरोवर को चीन से मुक्त किए जाने को लेकर इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि स्वतंत्रता क्या होता है ? यह हम जैसे लोग समझ सकते है, जिनके पास अपना देश होकर भी नहीं होता। भारत के लोग कश्मीर से कन्याकुमारी, मुंबई और गोवा जा सकते है, मैं भी चाहती हूं कि मैं अपने माता पिता के घर जाए और कैलाश मानसरोवर पर बिना रोक टोक के जाए। मौजूदा समय यह स्थिति नहीं है यह तिब्बत के लोग ही इसका दर्द समझ सकते है। हिन्दुस्तान के नौजवान पहले की तरह बिना रोक टोक कैलाश मानसरोवर जाने की मांग करते है। कैलाश मानसरोवर सहित पूरे तिब्बत को लेकर हमारी बात चीन से चल रही है। हमारे देश के नौजवान भी कहते है इतने दिनों से चीन से बात चल रही है, क्या हुआ ? हमसे सवाल किया जाता है। भारत को लेकर भी लोग सवाल करते है, कि भारत के पास इतनी बड़ी सेना है आक्रमण क्यों नहीं करती लेकिन सभी के साथ एक लिमिटेशन होती है। हमें उस लिमिटेशन में रखकर सभी कार्यों को करना चाहिए। भारत के नौजवान हमारी आशा कि किरण है। हिन्दुस्तान तिब्बत के लिए सबसे ग्रेट नेशन है और भारत के प्रधानमंत्री को हम सिर पर रखकर चलते है।


जानिए क्या बना तिब्बत और कैलाश मानसरोवर के मुक्ति का प्रशस्त
वाराणसी में तिब्बत की रक्षा मंत्री ने बताया कि दलाई लामा जी 1959 में भारत आये तो तिब्बत की जनसंख्या 6 मिलियन थी। उसमें से एक लाख भी उनके साथ नहीं आये थे। वह सिर्फ 60 से 80 हजार लोग निर्वासित होकर भारत पहुंचे। ज्यादातर लोग अभी भी चीन के कब्जे में तिब्बत में हैं। 2009 से नॉन वॉयलेंस प्रोटेस्ट कर रहे हैं। बाहर आंदोलन चल रहा है। वही अब नया चैप्टर लेकर मानवेन्द्र सिंह लेकर आये हैं मानसरोवर मुक्ति का। इससे तिब्बत की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। बता दें कि राष्ट्रीय अधिवेशन में यूपी समेत विभिन्न प्रदेशों से डेलीगेट्स इस अधिवेशन में पहुंचे थे। जो इस आंदोलन के लिए अपनी टीम बनाएंगे। SDTFA के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह मानव ने बताया कि कैलाश मान सरोवर की यात्रा और सहजता के लिए देश में कई मंथन शिविर हो चुके हैं। गौरतलब है कि भारत की भूमि के साथ तिब्बत पर चीन ने अपनी चतुराई से कब्जा जमाया हुआ है और उसी को लेकर कैलाश मानसरोवर और तिब्बत को मुक्त करवाए जाने की मांग की जा रही है।









