
भारत के एक टीचर ने वो काम कर दिखाया है…जो बहुत की कम लोग कर पाते है….इस टीचर ने अपने यूनिक काम के जरिए कमाल कर दिखाया है. और बहुत बड़ा अवॉर्ड हासिल किया है….
चलिए बता देते हैं कि आखिर कौन है वो टीचर जिन्होंने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है…
भारत की टीचर और सामाजिक कार्यकर्ता रूबल नागी ने अपने अनोखे पढ़ाने के तरीकों और वंचित बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों से पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन किया है. उन्हें दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट में शिक्षा के क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 से नवाजा गया, जिसकी राशि 10 लाख डॉलर है.

रूबल नागी ने 24 साल पहले सिर्फ 30 बच्चों के साथ एक छोटी कार्यशाला से अपने सफर की शुरुआत की थी.आज उनकी संस्था रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन पूरे भारत में 800 से अधिक शिक्षण केंद्र चला रही है, जिनमें स्कूल न जाने वाले वंचित बच्चों के साथ-साथ स्कूल जाने वाले बच्चों को भी अतिरिक्त शिक्षा दी जाती है.
रूबल का पढ़ाने का तरीका बेहद अनोखा है. वे झुग्गी-झोपड़ियों और सार्वजनिक जगहों की दीवारों पर शैक्षिक भित्ति चित्र बनाकर बच्चों को साक्षरता, गणित, विज्ञान और इतिहास जैसे विषयों को आसान और रोचक तरीके से सिखाती हैं.

ग्लोबल टीचर प्राइज लेते समय रूबल ने कहा, “यह सम्मान मेरे लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। मेरा बचपन का सपना था कि हर बच्चा स्कूल जाए.. आज उस सपने को साकार करने का मौका मिलना मेरे लिए बेहद विनम्र अनुभव है…
उनके इन प्रयासों ने लाखों बच्चों की जिंदगी में उम्मीद और शिक्षा की रोशनी फैलाई है… रूबल नागी का यह पुरस्कार भारतीय शिक्षा प्रणाली और सामाजिक योगदान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मिसाल बन गया है…









