यूपीः चंबल नदी खतरे के निशान से ऊपर, बीस से अधिक गांवों का तहसील मुख्यालय से टूटा संपर्क

पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश से नदियों का जलस्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है। जिसकी वजह ने आगरा जिले के बाह जैतपुर और पिनाहट ब्लॉक एक बार फिर से बाढ़ की चपेट में आ गए  है। बीस से ज्यादा ऐसे गांव है जिनका संपर्क तहसील मुख्यालय से पूरी तरह कट चुका है।

पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश से नदियों का जलस्तर काफी तेजी से बढ़ रहा है। जिसकी वजह ने आगरा जिले के बाह जैतपुर और पिनाहट ब्लॉक एक बार फिर से बाढ़ की चपेट में आ गए  है। बीस से ज्यादा ऐसे गांव है जिनका संपर्क तहसील मुख्यालय से पूरी तरह कट चुका है। हर तरफ सिर्फ और सिर्फ पानी ही नजर आ रहा है।

चंबल नदी इस समय पूरे उफान पर है। राजस्थान के कोटा बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। दो दिन में ही बीस लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है। जिसका सीधा असर आगरा जिले पर पड़ा है। चंबल नदी अपने खतरे के निशान 130 मीटर से ऊपर बह रही है। इस समय चंबल का जलस्तर 135 मीटर भी पार कर चुका है। सड़कें,खेत और गांव जलमग्न हो चुके है। बीस से अधिक गांव प्रभावित है।

गांव रानी पुरा, फट पुरा,गोहरा,भगवान पुरा,सिमराही,कुंवरखेड़ा,डाल का पुरा, गुड़ा,शिवलाल का पुरा,झरना पुरा,उमरैथा पुरा,बीच का पुरा, रेहा,कचियारा,डांगौरा, ऊपरी पुरा,गुर्जा ये वो गांव है जिनका संपर्क पूरी तरह से टूट चुका है। प्रशासन द्वारा इन गांव के लोगों के लिए व्यवस्था की गई है, चार से पांच स्टीमर लगातार ग्रामीणों की सहायता के लिए चल रहे है। आठ बाढ़ चौकियां स्थापित की गई है, जिसमे राजस्व विभाग,स्वास्थ्य विभाग, पुलिस,पशु चिकित्सा विभाग,विकास विभाग के कर्मचारी तैनात रहते है। जो ग्रामीणों तक राहत पहुंचा रहे है।

भारत समाचार की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची और उसके बाद हम उन गांव में पहुंचे जहा पहुंचना हर किसी के बस की बात नही है। स्टीमर के द्वारा हम प्रभावित गांव में पहुंचे। हालात ये है की जहां कभी गाड़ियां चला करती थी जो दो दिन पहले तक सड़क मार्ग थे अब वहा सिर्फ चंबल का पानी नजर आ रहा है। जिला मुख्यालय से करीब सौ किलोमीटर और स्टीमर से 18 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद जब हम प्रभावित गांव में पहुंचे तो वहा के हालात भयावह थे। लोग परेशान थे प्रशासन मदद जरूर कर रहा है पर वो नाकाफी है। पानी बढ़ने की वजह से बिजली काट दी गई है। ग्रामीणों के खेत हो,मकान हो या सामान सब डूब चुका है अब उन्हे प्रशासन से मुआवजे की उम्मीद है।

बाढ़ ने आम जन जीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। ग्रामीण परेशान है,उनके बाजरे के खेत डूब चुके है,चंबल गांव में पहुंचने की वजह से गांव में पीने का पानी भी कड़वा हो गया है। बिजली ना होने से दिक्कतें बढ़ती जा रही है इसीलिए ग्रामीण गांव में सोलर लाइट लगाने की प्रशासन से मांग कर रहे है।

प्रशासन उन तक मदद पहुंचाने का पूरा प्रयास कर रहा है लेकिन क्या वो काफी है। बाढ़ के बाद तो हालात बद से बदतर हो जायेंगे। उस समय ग्रामीणों को जल्द राहत की आवश्यकता होगी। उनकी फसल का उन्हे जल्द मुआवजा मिले, कही ऐसा ना हो की ये ग्रामीण भी मुआवजे के लिए ऑफिस के चक्कर की लगाते रह जाए।

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