UP: Prayagraj में 36 लाख से ज्यादा फर्जी मतदाता, आयोग ने किया सत्यापन का आदेश जारी…

मंडल के चार जिलों की बात की जाए तो सर्वाधिक 14 लाख 14 हजार 36 फर्जी मतदाता प्रयागराज जिले में पाए गए हैं। इन मतदाताओं के नाम दो या दो से अधिक क्षेत्रों में दर्ज हैं।

Prayagraj: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में चुनाव आयोग ने 36 लाख से ज्यादा फर्जी मतदाताओं की पहचान की है। आयोग ने इस मामले में गंभीर कार्रवाई करते हुए सभी मतदाता सूची का सत्यापन करने का आदेश जारी किया है।

बता दें, कि यह फर्जी मतदाता कई सालों से वोटिंग सूची में दर्ज थे, और चुनावी प्रक्रिया में अवैध रूप से शामिल होते रहे हैं। चुनाव आयोग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी संबंधित अधिकारियों को शीघ्र सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

बता दें, मंडल के चार जिलों की बात की जाए तो सर्वाधिक 14 लाख 14 हजार 36 फर्जी मतदाता प्रयागराज जिले में पाए गए हैं। इन मतदाताओं के नाम दो या दो से अधिक क्षेत्रों में दर्ज हैं। इसके अलावा, प्रतापगढ़ जिले में 11 लाख 44 हजार 579 मतदाता फर्जी पाए गए हैं, जबकि फतेहपुर में सात लाख 93 हजार 295 और कौशाम्बी में तीन लाख 11 हजार 366 मतदाता फर्जी हो सकते हैं।

वहीं, प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को विशेष कार्याधिकारी अखिलेश कुमार मिश्र द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 23 दिसंबर को प्रकाशित अनंतिम सूची में कुल 57 लाख 67 हजार 410 मतदाता फर्जी थे। अब इनका नाम विलोपित कर दिया गया है। यह सत्यापन पहले खंडवार किया गया था, और सभी जनपदों पर सत्यापन जरूरी कर दिया है।

बता दें, आयोग ने फर्जी मतदाताओं की सूची जारी करते हुए बताया कि इन मतदाताओं के नाम के साथ लिंग, आयु, माता-पिता आदि की जानकारी एक जैसी मिल रही है। मंडल के चार जिलों में इनकी संख्या छह लाख 79 हजार 730 है। इनमें प्रयागराज में तीन लाख 42 हजार 141, प्रतापगढ़ में दो लाख 70 हजार 637, फतेहपुर में दो लाख 10 हजार 953 और कौशाम्बी में 99 हजार 569 फर्जी समूह हैं।

वहीं, आयोग के आदेश के बाद अब जिलों में फर्जी मतदाताओं की सूची का सत्यापन किया जाएगा, जिससे अंतिम सूची में केवल असली मतदाताओं के नाम शामिल किए जा सकेंगे। आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मद्देनजर यह सत्यापन प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है।

बता दें, सहायक निर्वाचन अधिकारी सत्य प्रकाश बरनवाल ने बताया कि आयोग के निर्देश के बाद सत्यापन प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा किया जाएगा, ताकि फरवरी मध्य में होने वाले अंतिम प्रकाशन में सभी असली मतदाताओं के नाम दर्ज हो सकें।

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