
UPI NEWS: UPI…पेमेंट करने का एक ऐसा एप जो लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है…अगर देखा जाए तो हम एक दिन में UPI का इस्तेमाल कई बार करते हैं…
और जब भी हम इस एप का इस्तेमाल करते हैं तो हमें बहुत फायदा नजर आता है…कोई मेहनत नहीं और कोई भी झंझट नहीं और कुछ ही मिनटों में पेमेंट हो जाता है…
अब इसी UPI के इस्तेमाल को लेकर एक खुलासा हुआ…और सर्वे के जरिए ये पता लग चुका है कि अगर हमें UPI के इस्तेमाल के बदले में फीस देने पड़ी यानी की एप को इस्तेमाल करने के लिए किसी भी तरीके का शुल्क देना पड़ा तो, लोग इस इस्तेमाल करना बंद कर देंगा….चाहे हम एक दिन में कितनी भी बार इससे पेमेंट कर रहे हो….
बता दें कि एक सर्वे में हर चार में से तीन शख्स ने कहा कि अगर UPI ट्रांजैक्शन के लिए कोई फीस लगी तो वह इस्तेमाल करना बंद कर देगा. 2016 में शुरू हुआ UPI आज भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की रीढ़ बन चुका है. अब UPI के 10 साल पूरे होने पर एक चुनौती सामने आई है.लोग इसकी मुफ्त सेवा को सराह रहे हैं, इसलिए ट्रांजैक्शन फीस लगाने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध हो रहा है…जिससे सिस्टम की भविष्य की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं…
क्या लोग यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन फीस देने को तैयार है? यह जानने के लिए भारत के 376 जिलों के 39,000 से ज्यादा यूजर्स (68% पुरुष, 32% महिलाएं) का सर्वे किया हुआ….
पढ़िए सर्वे के नतीजे-
ट्रांजैक्शन फीस जैसी चीजों पर विचार हो रहा है। इसका फॉर्मेट कैसा होना चाहिए?
9%- ट्रांजैक्शन पर तय फीस हो
3%- ट्रांजैक्शन मूल्य के तय पसेंटेज के आधार पर फीस हो
13%- तय सीमा तक फिक्स फीस हो, फिर परसेंटेज के आधार पर
75%- कोई चार्ज न हो, अगर लगा तो मैं UPI का इस्तेमाल नहीं करूंगा/करूंगी।
पिछले 12 महीने में कितनी बार हुआ कि किसी बिजनेस ने UPI के लिए मना किया?
3% 20 बार से ज्यादा
8%-10-20 बार
8%-5-10 बार
20%-3-4 बार
18%- एक या दो बार
43%- कभी नहीं हुआ









