
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने ईरान पर किए गए अमेरिकी हमलों का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह समय दुनिया के लिए “नैतिक स्पष्टता” दिखाने का है और जहां संयुक्त राष्ट्र इस स्पष्टता में असफल रहता है वहां अमेरिका अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान जैसे देश का मानवाधिकार और कानून के शासन पर भाषण देना विडंबना है, जबकि पूरी दुनिया उसके कदमों को देख चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुवैत, बहरीन, कतर और जॉर्डन में अंधाधुंध हमले इस बात का प्रमाण हैं कि सख्त कार्रवाई जरूरी थी।
वॉल्ट्ज ने भरोसा दिलाया कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है और उनकी सुरक्षा किसी शर्त पर निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा कि इतिहास ने सिखाया है कि निष्क्रियता की कीमत निर्णायक कदम से कहीं अधिक होती है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सही समय पर फैसला लिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों—1696 (2006), 1737 (2006), 1747 (2007), 1803 (2008), 1835 (2008) और 1927 (2010)—का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर बार-बार अनुपालन नहीं किया।
इस बीच, इजरायल और अमेरिकी हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। देशभर में झंडे आधे झुके हुए हैं और शोक सभाएं आयोजित की जा रही हैं।









