
संयुक्त राज्य अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य टुकड़ियों की रणनीतिक पुनः तैनाती शुरू कर दी है, जो ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए की गई है। यह कदम संभावित सैन्य संघर्ष के लिए तैयार रहने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और जटिल हो सकती है।
विभिन्न अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सैनिकों की तैनाती:
जेरूसलम पोस्ट के अनुसार, न्यू यॉर्क टाइम्स से मिली जानकारी के मुताबिक, पेंटागन अधिकारियों ने बताया कि कई अमेरिकी सैनिकों को कतर के अल-उदीद बेस से स्थानांतरित कर दिया गया है। इस पुनः तैनाती का उद्देश्य सैनिकों को विभिन्न मिशनों पर भेजना है, हालांकि इन मिशनों की प्रकृति का खुलासा नहीं किया गया है। अमेरिकी सेना की यह रणनीति अन्य देशों जैसे कि बहरीन, इराक, सीरिया, कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य ठिकानों पर भी लागू की गई है।
ईरान से संभावित सैन्य टकराव की आशंका:
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस समय मध्य पूर्व में 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जिन्हें ईरान के साथ संभावित संघर्ष में सबसे बड़ा लक्ष्य माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष 2025 में अल-उदीद बेस पर हुए हमले से बहुत अलग होगा, जब ईरान ने अमेरिका को पहले से सूचना दी थी। ईरान के यूएन मिशन ने भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो “क्षेत्र में सभी ठिकाने, सुविधाएं और संसाधन वैध लक्ष्य होंगे।”
रक्षा तंत्र को मजबूत करना:
इन बढ़ते खतरों को देखते हुए, अमेरिका अपने रक्षा तंत्र को और मजबूत करने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम्स को मध्य पूर्व में तैनात कर रहा है ताकि अमेरिकी सैनिकों और उनके हितों की रक्षा की जा सके। इसके साथ ही, अमेरिका ने ईरान के क्षेत्र से दूरी बनाए रखते हुए दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स को तैनात किया है, ताकि वे प्रतिशोध के आसान लक्ष्य न बनें।
युद्ध की तैयारी और संभावित सैन्य कार्रवाई:
जेरूसलम पोस्ट ने यह भी बताया कि यह सैन्य पुनः तैनाती एक लंबी और कठिन सैन्य संलग्नता के लिए अमेरिका की तैयारियों को दर्शाती है। ट्रम्प प्रशासन फिलहाल संकट का कूटनीतिक समाधान तलाशने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन कुछ जानकारों का मानना है कि तेहरान से मिलने वाले प्रस्ताव ट्रम्प को सैन्य हमले से रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में बदलाव:
अंततः, राष्ट्रपति ट्रम्प ने हाल ही में ईरान के शासन परिवर्तन के विचार को उठाया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका की आंतरिक योजनाएँ और अधिक जटिल और महत्वाकांक्षी हो सकती हैं।









