अमेरिका-ईरान बातचीत के बीच तनाव में अस्थायी राहत, मिडिल ईस्ट संकट पर टिकी वैश्विक नजर…

मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए टालने का निर्देश दिया है।

मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए टालने का निर्देश दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है और दोनों पक्षों के बीच समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।

बता दें, ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बेहद सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने बताया कि इस बातचीत का उद्देश्य मिडिल ईस्ट में चल रही दुश्मनी का स्थायी समाधान निकालना है। इसी सकारात्मक माहौल को देखते हुए उन्होंने रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को फिलहाल पांच दिनों के लिए रोक दिया जाए।

बता दें, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला पूरी तरह से चल रही बातचीत की सफलता पर निर्भर करेगा। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो आगे भी तनाव कम करने की कोशिश जारी रहेगी, लेकिन अगर वार्ता विफल होती है, तो हालात फिर से गंभीर हो सकते हैं।

गौरतलब है कि इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

बता दें, ट्रंप इससे पहले ईरान को सख्त चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि यदि ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से नहीं खोलता है, तो अमेरिका उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला कर सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, और इसके बाधित होने से पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

वहीं, ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने चेतावनी दी है कि यदि उनके देश के पावर प्लांट्स या ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, तो वे पूरे क्षेत्र में ऊर्जा और तेल से जुड़े ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई का असर लंबे समय तक वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा और कीमतों में भारी उछाल आ सकती है।

बता दें, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई तेज हो गई। इसके बाद हालात लगातार बिगड़ते गए और कई देशों की चिंता बढ़ गई। संघर्ष के चलते समुद्री मार्गों में बाधा आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले पांच दिन बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं। यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल रहती है, तो मिडिल ईस्ट में शांति की दिशा में बड़ा कदम उठ सकता है। वहीं, बातचीत विफल होने की स्थिति में यह संघर्ष और भी भयावह रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

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