
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि वह दक्षिण कोरिया से आने वाले सामानों पर आयात शुल्क बढ़ा रहे हैं। इस कदम का मुख्य कारण यह है कि दक्षिण कोरिया की संसद ने अभी तक पिछले साल घोषित किए गए व्यापार ढांचे को मंजूरी नहीं दी है।
बता दें, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस निर्णय की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि इससे किस प्रकार के सामान प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि अब से दक्षिण कोरिया से आने वाली कारों, लकड़ी और दवाओं पर टैरिफ बढ़ाया जाएगा। अन्य सामानों पर भी टैरिफ की दर को 15% से बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया उन देशों में शामिल है जिनके साथ अमेरिका के मजबूत आर्थिक संबंध हैं।
वहीं, इस फैसले के तहत ट्रंप ने ‘आर्थिक आपातकाल’ घोषित किया, जिससे वह अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को दरकिनार कर रहे हैं। दरअसल, दक्षिण कोरिया में इस व्यापार ढांचे के लिए विधायी मंजूरी की आवश्यकता थी, जो अभी तक नहीं मिला। इससे नाराज ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमने हमेशा व्यापार समझौतों में अपनी जिम्मेदारी निभाई है और टैरिफ को कम किया है। लेकिन अब जब दक्षिण कोरिया ने हमारी अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया, तो हमें अपने टैरिफ बढ़ाने होंगे।”
बता दें, दक्षिण कोरिया ने इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें अभी तक अमेरिका की तरफ से टैरिफ वृद्धि की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। दक्षिण कोरिया ने स्थिति को संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके लिए उनके उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान इस समय कनाडा के दौरे पर हैं और वह जल्द ही अमेरिका जाने वाले हैं। वहां वह अमेरिकी वाणिज्य सचिव के साथ बातचीत करेंगे और इस मुद्दे पर समाधान की कोशिश करेंगे।
वहीं, यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति और दक्षिण कोरिया के बीच उतार-चढ़ाव भरे व्यापार संबंधों को दर्शाता है। ट्रंप ने पहले भी अपने टैरिफ को दक्षिण कोरिया द्वारा अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 350 अरब डॉलर का निवेश करने के साथ जोड़ने की कोशिश की थी, जिसमें अमेरिकी शिपयार्ड के पुनर्निर्माण की बात शामिल थी। पिछले साल, जॉर्जिया में ‘हुंडई’ की मैन्युफैक्चरिंग साइट पर आव्रजन अधिकारियों के छापे ने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया था।
वहीं, यह घोषणा एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें ट्रंप अन्य देशों को अपनी शर्तों पर व्यापार करने के लिए दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में, ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, हालांकि दावोस में बैठक के बाद उन्होंने इस फैसले को वापस ले लिया। इसके अलावा, ट्रंप ने कनाडा को चेतावनी दी थी कि यदि वह चीन के साथ व्यापार बढ़ाता है, तो वह कनाडाई सामानों पर 100% टैक्स लगा सकते हैं।
वैश्विक व्यापार के संदर्भ में ट्रंप की यह नीति अमेरिकी व्यापारियों और मतदाताओं के लिए बड़ा असर डाल सकती है। इस साल अमेरिका कनाडा और मैक्सिको के साथ अपने 2020 के संशोधित व्यापार समझौते पर फिर से बातचीत करने के लिए तैयार है। इसके अलावा, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट यह फैसला करने वाला है कि क्या ट्रंप ने ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत टैरिफ घोषित करके अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है या नहीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की यह घोषणा न केवल दक्षिण कोरिया, बल्कि अन्य देशों के साथ अमेरिका के व्यापार संबंधों पर भी असर डाल सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में व्याप्त अस्थिरता को देखते हुए, यह कदम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। अब देखना यह होगा कि क्या दक्षिण कोरिया के साथ इस तनाव को सुलझाने के लिए कोई सकारात्मक समाधान निकाला जा सकता है।









