अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निमंत्रण दिया, बस करना होगा ये काम!

वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए एक ऐतिहासिक और साहसिक प्रयास बताया. अगर भारत इस न्योते को स्वीकार करता है, तो वह तीन वर्षों के लिए इस बोर्ड का हिस्सा बनेगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस गंभीर मामले में निमंत्रण दिया है. और ये निमंत्रण बोर्ड ऑफ पीस के मामले में दिया गया. चलिए अब बतातें हैं कि पूरा मामला क्या है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है.ट्रंप ने इस पहल को मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने और वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए एक ऐतिहासिक और साहसिक प्रयास बताया. अगर भारत इस न्योते को स्वीकार करता है, तो वह तीन वर्षों के लिए इस बोर्ड का हिस्सा बनेगा.

जानकारी के लिए बता दें कि इस बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप करेंगे, और इसकी स्थापना का उद्देश्य गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के लिए शासन की देखरेख और वित्तपोषण का समन्वय करना है. इसके अलावा, इस बोर्ड को अन्य वैश्विक संघर्षों में भी अहम भूमिका निभाने की संभावना है. ट्रंप के पत्र में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी को मध्य पूर्व में शांति बहाल करने के लिए इस ‘महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और शानदार प्रयास’ में शामिल होने का निमंत्रण देना उनके लिए गर्व की बात है.

इसके अलावा, अगर कोई देश इस बोर्ड का स्थाई सदस्य बनना चाहता है, तो उसे 1 बिलियन डॉलर का योगदान देना होगा. यह धन बोर्ड की गतिविधियों में उपयोग किया जाएगा.

इस बोर्ड के सदस्य बनने के लिए भारत के अलावा इजरायल, मिस्र, तुर्की, कतर, पाकिस्तान, कनाडा और अर्जेंटीना जैसे 50 देशों को आमंत्रित किया गया है. इसकी आधिकारिक सदस्य सूची आगामी दिनों में दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान जारी की जा सकती है.

व्हाइट हाउस ने इस बोर्ड के विजन को लागू करने के लिए एक कार्यकारी समिति भी गठित की है, जिसमें प्रमुख नामों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा शामिल हैं.

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