Uttar Pradesh: बीमा कंपनियों के सिंडिकेट से किसानों की उम्मीदें ध्वस्त, 2.5 लाख किसानों में से सिर्फ 8,317 को मिला फसल बीमा लाभ!

बैंकों की लापरवाही और असहमति प्रक्रिया के कारण यह योजना किसानों के लिए पूरी तरह से फेल होती दिख रही है। इस पर खास देने की जरुरत हैं। किसान हमारे देश के अन्नदाता हैं उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिे किसी भी कीमत पर….

Uttar Pradesh: कृषि क्षेत्र में एक अहम कदम के रूप में शुरू की गई फसल बीमा योजना, जो किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसलों के नुकसान की भरपाई प्रदान करने के लिए थी, बैंकों की लापरवाही और मनमानी के कारण विफल होती दिख रही है। जिले में रबी फसल के लिए बीमा कराने की अंतिम तिथि तक लगभग 60 प्रतिशत किसान योजना से बाहर हो चुके हैं।

आंकड़ा योजना की नाकामी

जनपद में कुल 2,46,735 किसान हैं, जिनमें से 23,410 किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से फसली ऋण लिया है। लेकिन इनमें से केवल 8,317 किसानों का ही फसल बीमा हो पाया है। यह आंकड़ा योजना की नाकामी को दर्शाता है, जहां असहमति प्रक्रिया और बैंक कर्मियों की लापरवाही के कारण किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

बैंकों की मनमानी और लापरवाही

सहकारी बैंकों और कई राष्ट्रीयकृत बैंकों की स्थिति बेहद खराब है। इन बैंकों के कर्मी किसानों से बिना बताए असहमति पत्रों पर हस्ताक्षर करवा लेते हैं, जिससे किसानों का फसल बीमा हो ही नहीं पाता। बैंक कर्मियों की इस उदासीनता के कारण किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई का लाभ नहीं मिल रहा है। योजना में कोई कमीशन राशि न होने के कारण बैंक कर्मी इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके अलावा, अतिरिक्त काम से बचने के लिए फसल बीमा प्रीमियम की राशि पोर्टल पर अपलोड नहीं की जाती। कई बैंक तो इस योजना में पूरी तरह से रुचि ही नहीं ले रहे हैं।

किसानों की उम्मीद पर संकट

फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना था, लेकिन बैंकों की लापरवाही के कारण किसान अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का बोझ भी उनके कंधों पर आ जाता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

उपनिदेशक कृषि प्रसार, टीएस गौतम ने कहा कि बैंकों द्वारा किसानों को बिना बताए असहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराने की कोई शिकायत नहीं मिली है, हालांकि रैंडम मामलों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि विगत बैठक में जिलाधिकारी ने बैंकों को फसल बीमा योजना में रुचि न लेने पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

किसानों की स्थिति गंभीर

किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण लेने वाले किसानों में से मात्र 8,317 को ही फसल बीमा का लाभ मिला है, जो कि योजना की सफलता को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। यह सिर्फ फर्रुखाबाद जिले की स्थिति नहीं है, बल्कि हर जिले में यही स्थिति है, जहां किसानों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।यूपी सरकार के अधिकारियों और बीमा कंपनियों के बीच मिलीभगत की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे किसानों को बीमा का लाभ मिलने में और भी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

योजना किसानों के लिए पूरी तरह से फेल

फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए था, लेकिन बैंकों की लापरवाही और असहमति प्रक्रिया के कारण यह योजना किसानों के लिए पूरी तरह से फेल होती दिख रही है। इस पर खास देने की जरुरत हैं। किसान हमारे देश के अन्नदाता हैं उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिे किसी भी कीमत पर….

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