उत्तराखंड स्थापना दिवस : भारतीय संस्कृति, जीवन दर्शन और आध्यत्मिकता का प्रतीक है उत्तराखंड

उत्तराखंड को "देव भूमि" के नाम से जाना जाता है। यह भारतीय संस्कृति, प्राचीन दर्शन और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। हिन्दू धर्म के चार पवित्र तीर्थ स्थल- यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ भी यहीं स्थित है। इन चारों स्थलों को छोटा चार धाम भी कहा जाता है।

उत्तरांचल राज्य के गठन को चिह्नित करने के लिए हर साल 9 नवंबर को उत्तराखंड स्थापना दिवस, या उत्तराखंड दिवस मनाया जाता है। उत्तराखंड का गठन साल 2000 में किया गया था। शुरुआत में इसे उत्तरांचल नाम से जाना जाता था बाद में साल 2007 में राज्य का नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया था।

साल 2016 में, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य की स्थापना दिवस के अवसर ओर 16 वीं वर्षगांठ मनाते हुए उत्तराखंड रत्न पुरस्कार देने की घोषणा की। उत्तराखंड की राजधानी ‘देहरादून’ थी लेकिन मार्च 2020 में गैरसैन को इसकी ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित की गयी।

उत्तरखंड को देवताओं की भूमि या “देव भूमि” के रूप में जाना जाता है। हिन्दू धर्म के चार पवित्र तीर्थ स्थल- यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ भी यहीं स्थित है। इन चारों स्थलों को छोटा चार धाम भी कहा जाता है।

यूपी के मुख्यमंत्री ने भी उत्तराखंड के लोगों को बधाई देते हुए सोशल मीडिया साइट कू पर लिखा है,”प्राकृतिक सुरम्यता व सुष्मिता से पूरित तथा सनातन संस्कृति के अनेक प्रतीकों को संजोए देवभूमि उत्तराखंड राज्य के स्थापना दिवस की सभी उत्तराखंड वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि यह रमणीय प्रदेश प्रगति-पथ पर निरंतर गति करता रहे।”

उत्तराखंड राज्य भारतीय संस्कृति, प्राचीन दर्शन और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। पर्यटन के दृष्टिकोण से भी उत्तराखंड राज्य का विशेष महत्व है। प्रकृति की गोद में बसा सुरम्य राज्य उत्तरखंड अनायास ही विदेशी पर्यटकों को अपने ओर आकर्षित करता है और सनातन भारतीय संस्कृति को विश्वभर में फैला रहा है।

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