उत्तराखंड में अंकिता भंडारी के लिए उग्र प्रदर्शन, वीआईपी नाम उजागर करने को लेकर हंगामा

पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग से रोक लिया, जिसके बाद कुछ लोग बैरिकेड पर चढ़ गए। विभिन्न संगठनों की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह को ज्ञापन भी सौंपा गया।

उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच और वीआईपी के नाम उजागर करने की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन जारी है। रविवार को विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सीएम आवास की ओर कूच किया। इस दौरान पुलिस के साथ नोकझोंक और धक्का-मुक्की की घटनाएं भी हुईं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस मामले में जांच पूरी निष्पक्षता से नहीं हो रही और उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपकर दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाए।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन पहले दिन से ही जनता ने लड़ा था, जिसके परिणामस्वरूप तीन आरोपी सलाखों के पीछे हैं। अब जनता को न्याय की लड़ाई में और भी मजबूती से खड़ा रहना होगा। जब प्रदर्शनकारी सीएम आवास की ओर बढ़े तो पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग से रोक लिया, जिसके बाद कुछ लोग बैरिकेड पर चढ़ गए। विभिन्न संगठनों की ओर से सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह को ज्ञापन भी सौंपा गया।

इस बीच, दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रवासी उत्तराखंडी भी इस मामले में प्रदर्शन करते नजर आए। कांग्रेस के नेताओं ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने की मांग की और आरोप लगाया कि सरकार दोषियों और वीआईपी को बचा रही है। कांग्रेस नेता धीरेंद्र प्रताप और हरिपाल रावत ने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई को नहीं सौंपी जाती, तो भाजपा मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।

वहीं, भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पर इस मामले में राजनीति करने का आरोप लगाया और लैंसडौन चौक पर विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा ने दावा किया कि राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है और निष्पक्ष जांच जारी है। भाजपा नेताओं का कहना था कि कांग्रेस केवल राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैला रही है और मामले को गुमराह कर रही है।

महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट ने कहा कि राज्य सरकार और जांच एजेंसियां पूरी प्रतिबद्धता के साथ पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए काम कर रही हैं। राज्य मंत्री विनोद उनियाल ने भी कहा कि अगर कांग्रेस को सीबीआई जांच चाहिए, तो उन्हें इसके लिए न्यायालय का रुख करना चाहिए।

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