
उम्र भले ही जीवन के वर्षों को गिनती हो, लेकिन सपनों को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती। इस बात को गांव बड़ावद के रहने वाले विजय कुमार शर्मा ने साबित कर दिखाया है। करीब 59 वर्ष 8 महीने की उम्र में लंबे संघर्ष और लगातार प्रयास के बाद उनका चयन TGT संस्कृत शिक्षक के पद पर हुआ है। उनकी सफलता की कहानी धैर्य, मेहनत और अपने लक्ष्य पर भरोसा बनाए रखने की मिसाल है।
सरकारी नौकरी के लिए वर्षों तक करते रहे प्रयास
शहर के दून पब्लिक स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्यरत विजय कुमार शर्मा लंबे समय से सरकारी नौकरी पाने के लिए प्रयासरत थे। उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और सरकारी शिक्षक बनने के अपने लक्ष्य की ओर प्रयास जारी रखा। आखिरकार 22 सितंबर को वह दिन आया, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था।
CM Yogi के हाथों मिला नियुक्ति-पत्र
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों विजय कुमार शर्मा को नियुक्ति-पत्र मिला। उनका चयन TGT संस्कृत शिक्षक के रूप में हुआ है और उन्हें शामली जनपद के गांव एलम स्थित इंटर कॉलेज में नियुक्ति मिली है।
उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चयनित 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र वितरित किए गए।
27 साल के संघर्ष के बाद मिली सफलता
मूल रूप से गांव बड़ावद के रहने वाले विजय कुमार शर्मा के लिए यह नियुक्ति-पत्र सिर्फ सरकारी नौकरी मिलने का दस्तावेज नहीं, बल्कि करीब 27 वर्षों के संघर्ष, धैर्य और विश्वास का परिणाम है।
कई बार प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी। उनकी कहानी यह बताती है कि लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास किया जाए तो लंबे इंतजार के बाद भी सफलता हासिल की जा सकती है।
दून पब्लिक स्कूल परिवार ने किया सम्मानित
विजय कुमार शर्मा की इस उपलब्धि पर दून पब्लिक स्कूल परिवार की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। स्कूल परिवार ने उनकी सफलता पर खुशी जताई और उनके लंबे संघर्ष के बाद सरकारी शिक्षक बनने पर उन्हें बधाई दी।
दो साल चार महीने तक करेंगे सरकारी शिक्षक के रूप में सेवा
विजय कुमार शर्मा की उम्र करीब 59 वर्ष 8 महीने है। शिक्षक की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है। इस लिहाज से उन्हें सरकारी शिक्षक के रूप में करीब दो साल चार महीने सेवा करने का अवसर मिलेगा।
उनकी यह उपलब्धि उम्र की सीमा से आगे बढ़कर सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देती है। 27 वर्षों तक लगातार प्रयास करने के बाद सरकारी शिक्षक बनने का उनका सपना आखिरकार पूरा हो गया।









