राहुल-माया के बीच वार-पलटवार के क्या हैं सियासी मायने? 2024 के केंद्रीय चुनाव पर कांग्रेस की नजर..?

यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद अब पार्टी की नजर 2024 के केंद्रीय चुनावों पर है। लिहाजा, कुछ राजनैतिक समीक्षकों और विश्लेषकों का ऐसा भी मनना है कि राहुल गांधी का यह बयान 2024 चुनाव को लेकर विपक्ष की एकजुटता का भी आह्वान हो सकता है।

बीते दिनों दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन के दौरान राहुल गांधी ने बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर बड़ा बयान दिया था। राहुल गांधी का यह बयान उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में गठबंधन को लेकर था। राहुल ने कहा कि उन्होंने मायावती के समक्ष BSP-Congress गठबंधन का प्रस्ताव रखा था लेकिन उन्हें ED और CBI का डर था और उन्होंने इस प्रस्ताव को लेकर कोई प्रतिक्रया नहीं दी।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल मचना तय था। उनके इस बयान के ठीक एक दिन बाद मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया और राहुल गांधी की मानसिकता को जातिवादी बताते हुए और कांग्रेस को तमाम तरह के नकारात्मक उपाधियों से नवाज दिया। उन्होने कहा कि राहुल के बयान में जातिवादी मानसिकता है। कांग्रेस ने दलितों के लिए कुछ नहीं किया। उन्होने कहा कि कांग्रेस का हाल खिसियानी बिल्ली जैसा है। कांग्रेस अपने बिखरे घर को संभाल नहीं पा रही है।

मायावती और राहुल गांधी के बीच चले ताजा वार-पलटवार के घटनाक्रमों को देखें तो कहीं न कहीं इसे 2024 के केंद्रीय चुनाव की शुरूआती तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा सकता है। राजनैतिकी विश्लेषकों का ऐसा मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान 2024 चुनाव के लिए विपक्षी एकजुटता को लेकर शुरूआती संकेत हो सकता है।

यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद अब पार्टी की नजर 2024 के केंद्रीय चुनावों पर है। लिहाजा, कुछ राजनैतिक समीक्षकों और विश्लेषकों का ऐसा भी मनना है कि राहुल गांधी का यह बयान 2024 चुनाव को लेकर विपक्ष की एकजुटता का भी आह्वान हो सकता है। बहरहाल, मायावती का यह कांफ्रेंस कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फेरने जैसा प्रतीत होता है क्योंकि उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी कांग्रेस से गठबंधन करने की ना पहले कोई रणनीति थी ना आगे है।

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