कौन थे अली लारिजानी..?, इजराइली हमले में हुई जिनकी मौत से ईरान को लगा बड़ा झटका

जंग के तीसरे हफ्ते में इजराइल डिफेंस फोर्स ने ईरान के सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारिजानी की हत्या कर दी है। इस हत्या के बाद...

जंग के तीसरे हफ्ते में इजराइल डिफेंस फोर्स ने ईरान के सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारिजानी की हत्या कर दी है। इस हत्या के बाद ईरान में सियासी और सैन्य हालात पर गहरा असर पड़ सकता है।

इजराइल ने लारिजानी को ईरान का असली नेता बताया

इजराइल डिफेंस फोर्स ने अपने एक बयान में कहा कि उसने स्ट्राइक के जरिए अली लारिजानी को मार डाला, जिसे ईरान में नरसंहार का कर्ता-धर्ता माना जाता है। लारिजानी को इस्लामिक गणराज्य का वास्तविक नेता करार देते हुए इजराइल ने यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने ईरान के सैन्य ऑपरेशनों को बढ़ावा दिया था। लारिजानी जून 2025 में ईरान सर्वोच्च परिषद के प्रमुख बने थे।

लारिजानी का महत्व और उनकी हत्या के प्रभाव

  1. सैन्य ऑपरेशनों का प्रमुख था लारिजानी
    लारिजानी ईरान के दूसरे सबसे शक्तिशाली शख्स थे, और उनका काम सैन्य ऑपरेशनों के समन्वय का था। उनके निर्देशन में ही ईरान को जंग में लगातार बढ़त मिल रही थी। हाल ही में उन्होंने मुस्लिम देशों से यहूदी शासन के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करने की अपील की थी। अब उनकी हत्या से ईरान के लिए युद्ध की दिशा और जटिल हो सकती है।
  2. कूटनीतिक महत्व और रूस से संबंध
    लारिजानी को एक कुशल कूटनीतिज्ञ माना जाता था। उन्होंने सऊदी अरब और ईरान के बीच कई वर्षों से चले आ रहे विवाद को सुलझाया था। रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ भी उनके अच्छे संबंध थे। लारिजानी की वजह से कई दुश्मन देशों ने युद्ध में अब तक चुप्पी साधी थी, लेकिन अब ईरान को चौतरफा खतरे का सामना करना पड़ सकता है।
  3. मुज्तबा खामेनेई की भूमिका पर संकट
    लारिजानी की हत्या के बाद ईरान में एक नया सवाल खड़ा हो गया है। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई अंडरग्राउंड हैं और घायल होने की खबरें हैं। अब लारिजानी की जगह कौन सुरक्षा परिषद का प्रमुख बनेगा, यह एक बड़ा सवाल है, क्योंकि लारिजानी से पहले इस पद पर जो व्यक्ति थे, वे युद्ध में फ्लॉप साबित हुए थे।

लारिजानी कौन थे?

अली लारिजानी ईरान के सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के प्रमुख थे, जिसका काम युद्ध की स्थिति में सभी सैन्य इकाइयों के साथ बेहतर समन्वय बनाना था। वे 2005 में पहली बार इस परिषद के सचिव नियुक्त हुए थे और लंबे समय से ईरान के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य और कूटनीतिक फैसलों का हिस्सा रहे थे।

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