
मनोरंजन डेस्क : बॉलीवुड के मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने अपने नाती अगस्त्य नंदा की तगड़ी सफलता पर गर्व जताया। अगस्त्य की हालिया फिल्म ‘इक्कीस’ ने 2026 की शुरुआत में बॉक्स ऑफिस पर शानदार ओपनिंग की है। फिल्म ने पहले चार दिनों में 22.05 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया, जिससे यह फिल्म बड़ी हिट साबित हो रही है।
अमिताभ बच्चन ने अपने पोते की सफलता पर खुशी जताते हुए ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “YO .. अगस्त्य .. बहुत बढ़िया ..” फिल्म के मेकर्स द्वारा शेयर किए गए कलेक्शन पोस्ट से यह जानकारी मिली कि ‘इक्कीस’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत की है। पहले दिन 7.28 करोड़ रुपये, दूसरे दिन 4.02 करोड़ रुपये, तीसरे दिन 5.05 करोड़ रुपये और चौथे दिन 5.70 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इस प्रकार फिल्म ने कुल 22.05 करोड़ रुपये कमाए।
T 5616(i) – YO .. Agastya .. way to go .. pic.twitter.com/CfwV2sFhUQ
— Amitabh Bachchan (@SrBachchan) January 5, 2026
‘इक्कीस’ एक वॉर बायोपिक है, जो सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की जिंदगी पर आधारित है, जो परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के सैनिक थे। फिल्म में जयदीप अहलावत, सुहासिनी मुले, सिकंदर खेर और राहुल देव भी अहम भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म 1 जनवरी, 2026 को रिलीज़ हुई थी और दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है।
अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग पर एक इमोशनल पोस्ट भी लिखा, जिसमें उन्होंने अगस्त्य के जन्म से लेकर उसे बड़े पर्दे पर देखने तक की खास यादें साझा कीं। बिग बी ने कहा, “इमोशंस बहते हैं.. जैसे आज रात बहते हैं जब आप पोते को IKKIS में कमाल करते देखते हैं.. वह समय जब उसकी माँ, श्वेता को आखिरी लेबर पेन के लिए ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल ले जाया जा रहा था.. उसका जन्म.. कुछ ही घंटों बाद उसे गोद में लेना, और यह बात करना कि क्या उसकी आँखें नीली हैं.. वह समय तक जब वह थोड़ा बड़ा हुआ और मैंने उसे अपनी बाहों में लिया, और वह मेरी दाढ़ी से खेलता है.. उसके बढ़ने तक.. उसके एक्टर बनने के आखिरी पर्सनल फैसले तक, और आज रात उसे फ्रेम में देखना, हर बार जब वह फिल्म के फ्रेम में आता है तो मैं अपनी आँखें नहीं हटा पाता।”
अगस्त्य की फिल्म ‘इक्कीस’ में परफॉर्मेंस की तारीफ करते हुए अमिताभ बच्चन ने कहा कि अगस्त्य ने “बिना किसी फिल्टर के ईमानदारी” दिखाई। उन्होंने यह भी कहा, “जब वह फ्रेम में होते हैं तो आप सिर्फ उन्हें देखते हैं.. और यह कोई दादाजी नहीं बोल रहे हैं, यह सिनेमा का एक पक्का दर्शक है.. और फिल्म अपने प्रेजेंटेशन में बेदाग है.. इसकी राइटिंग.. इसका डायरेक्शन.. और जब यह खत्म होती है.. तो आंखें खुशी और गर्व के आंसुओं से भर जाती हैं.. बोल नहीं पाते.. खामोशी में। वह खामोशी जो मेरी है.. मेरी समझ की.. किसी और की नहीं।”









