
UP by election: लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बड़ी जीत हासिल करने के बाद से इंडिया गठबंधन का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है. यही वजह है कि प्रदेश के 10 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए रणनीति बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. हालांकि इस प्रक्रिया में एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी समाजवादी पार्टी पर ज्यादा सीटें देने का दबाव बना रही है. वही उपचुनावों के लिए सपा संग सीट बंटवारे की कमान संभालते हुए एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दिखाई दे रहे हैं। लोकसभा चुनावों के दौरान भी उन्हीं की अगुआई में सपा के साथ गठबंधन मुकम्मल हो सका था, जोकि एक वक्त टूटता दिख रहा था। सूत्र बताते हैं कि यह फैसला हाल ही में लिया गया है। राहुल को गठबंधन में सीटें तय करने के लिए इसलिए आगे किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह के विवाद की स्थिति पैदा न हो। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस 10 में से 4 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारना चाहती है. जबकि शुरुआती बातचीत में समाजवादी पार्टी तैयार नहीं हो रही थी. अब कांग्रेस और सपा दोनों ही चाहती हैं कि वे गठबंधन बरकरार रखें और उपचुनाव में भी सपा और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरें, लेकिन कांग्रेस और सपा की अतिमहत्वकांक्षा इसमें रोड़ा बनती दिख रही है।
सीटें बन रहीं गठबंधन में रोड़ा
सूत्रों की मानें तो उपचुनाव में कांग्रेस तीन-चार सीटें चाहती है, जबकि सपा उसे एक या दो सीट ही देना चाहती है। यही नहीं इसके एवज में वह महाराष्ट्र और हरियाणा में भी विधानसभा चुनावों में अपने लिए सीटें चाहती है। मिली जानकारी के अनुसार इससे देनें में खींचतान की स्थिति आ सकती है। ठीक उसी तरह जैसे मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दौरान आई थी। यही खींचतान लोकसभा चुनाव के सपा-कांग्रेस गठबंधन फाइनल होने का मुख्य रोड़ा बन गई थी। राहुल गांधी की अगुआई में जब बातचीत हुई उसके बाद ही गठबंधन की राह निकल सकी थी। कांग्रेस मानती है कि उसके लिए यूपी में अपने पांव मजबूत करने के लिए सपा का साथ जरूरी है। ऐसे में एक अच्छे संदेश के साथ गठबंधन करने की पूरी कोशिश होगी। राहुल गांधी इसकी अगुआई करेंगे तो एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा और खींचतान की गुंजाइश भी कम होगी।
दोनों पार्टियां उतार चुकी अपने पर्यवेक्षक
सपा 10 में से 6, जबकि कांग्रेस सभी 10 सीटों पर अपने पर्यवेक्षक उतार चुकी है। तमाम राजनीतिक जानकार इसे खींचतान की शुरुआत मान रहे हैं। कुछ समय पहले कांग्रेस ने जिला अध्यक्षों के साथ बैठक में साफ कर दिया था कि जिन सीटों पर सपा के विधायक जीते थे, उन पर वह दावा नहीं करेगी, जबकि एनडीए के पास रहीं पांच सीटों पर उसकी दावेदारी होगी। पांच में से कितनी सीटें कांग्रेस के पास आएंगी, यह बाद में तय किया जाएगा, लेकिन सपा ने छह सीटों पर प्रभारी उतारकर साफ कर दिया है कि वह ये छह सीटें तो नहीं ही देने जा रही है। बची चार सीटों में तय होगा कि कितनी सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी उतरेंगे। हालांकि अब ये देखना काफी दिलचस्प होगा की दोनों पार्टियों में आखिरकार कितनी सीटों पर सहमती बनती हैं या बिगड़ती हैं.









