
उत्तरकाशी: आज से उत्तराखंड की सबसे प्रमुख और धार्मिक यात्रा, चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया। इस अवसर पर एक अद्भुत धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला, जब खरशाली (खुशिमठ) स्थित शीतकालीन गद्दी स्थल से माँ यमुना की उत्सव डोली, समेश्वर देवता की अगुवाई में यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई।
माँ यमुना की डोली का प्रस्थान
यात्रा के दौरान, खरशाली और आसपास के गांवों में एक भावुक माहौल था, जहाँ श्रद्धालु अपने आराध्य देवी माँ यमुना को नम आंखों से विदा कर रहे थे। ढोल-नगाड़ों, मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच डोली यात्रा ने क्षेत्रवासियों को भक्ति भाव से सराबोर कर दिया।
माँ यमुना की भोग मूर्ति शीतकाल में खरशाली गद्दी स्थल पर विराजमान रहती है, जहाँ परंपरागत पूजा-अर्चना और दर्शन किए जाते हैं। अब, ग्रीष्मकाल की शुरुआत के साथ, माँ यमुना की पूजा और दर्शन यमुनोत्री धाम में संपन्न होंगे।
यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं का रेला
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माँ यमुना यमुनोत्री धाम में भैया दूज (यम द्वितीया) तक विराजमान रहती हैं। इस दौरान लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से यमुनोत्री धाम पहुंचकर माँ के दर्शन का लाभ लेते हैं। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को भी संजोने का माध्यम है।
यात्रियों के लिए प्रशासन की तैयारियाँ
चारधाम यात्रा के शुभारंभ के साथ ही प्रशासन और मंदिर समिति ने यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सुव्यवस्थित दर्शन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। आने वाले दिनों में यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है, जिसके लिए सरकार और प्रशासन पूरी तरह से तैयार हैं।









