
राफेल ग्रॉसी ने IAEA के दृष्टिकोण से साझा की अपनी राय
ईरान पर चिंता जताई
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल मरीयानो ग्रॉसी ने हाल ही में भारत का दौरा किया और शीर्ष सरकारी नीति निर्धारकों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई। ग्रॉसी ने कहा, “ईरान फिलहाल परमाणु हथियार नहीं बना रहा है, लेकिन वह यूरेनियम को लगभग हथियार-ग्रेड स्तर तक समृद्ध कर रहा है और कई सवालों के जवाब नहीं दे रहा है।” उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय के लिए यह चिंता का विषय है और इसे हल करने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा।
यूक्रेन संकट पर बयान
यूक्रेन के बारे में ग्रॉसी ने कहा कि वहां की स्थिति अब भी नाजुक है। उन्होंने विशेष रूप से ज़ापोरिज़्ज़िया परमाणु संयंत्र का जिक्र किया, जो युद्ध के मोर्चे पर है और कई बार हमलों का शिकार हो चुका है। उन्होंने कहा कि IAEA का वहां होना स्थिति के जोखिम को कम करने में मदद कर रहा है, लेकिन परमाणु दुर्घटनाओं का खतरा अभी भी मौजूद है।
भारत की परमाणु ऊर्जा पहल को सराहा
भारत में परमाणु ऊर्जा के उपयोग पर ग्रॉसी ने सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “भारत के पास अत्याधुनिक परमाणु तकनीक है, जिसे पहले पश्चिमी तकनीक से प्रेरित किया गया था, लेकिन अब यह पूरी तरह से स्वदेशी है।” उन्होंने भारत के परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की और कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
निजी क्षेत्र के प्रवेश को अहम कदम बताया
भारत सरकार के छोटे रिएक्टरों में निजी क्षेत्र को अनुमति देने के निर्णय पर ग्रॉसी ने इसे एक “सिद्ध कदम” बताया। उनका मानना है कि परमाणु ऊर्जा पूंजी-गहन है और इसे सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र से नहीं पूरा किया जा सकता। इसके लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी और निजी स्वामित्व को बढ़ावा देना होगा।
निष्कर्ष
राफेल ग्रॉसी का यह बयान भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और वैश्विक परमाणु सुरक्षा पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। उनके विचारों से यह स्पष्ट होता है कि परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षाएं और वैश्विक भूमिका बढ़ती जा रही है।









