UNHRC में उठी जम्मू-कश्मीर में महिला सशक्तिकरण की गूंज, बदलते सामाजिक माहौल की दी मिसाल…

राष्ट्रीय सेवा केंद्र संघ (RSKS) का प्रतिनिधित्व करते हुए एक्टिविस्ट दरक्शां हसन भट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में महिलाओं और लड़कियों के लिए नए अवसरों के दरवाजे खुल रहे हैं और यह क्षेत्र तेजी से सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 61वें सत्र में जम्मू-कश्मीर में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण और सामाजिक बदलावों का मुद्दा उठाया गया। राष्ट्रीय सेवा केंद्र संघ (RSKS) का प्रतिनिधित्व करते हुए एक्टिविस्ट दरक्शां हसन भट ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में महिलाओं और लड़कियों के लिए नए अवसरों के दरवाजे खुल रहे हैं और यह क्षेत्र तेजी से सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

वहीं, अपने संबोधन में दरक्शां हसन भट ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर का भविष्य उज्ज्वल है और यह भविष्य महिलाओं की भागीदारी से ही आकार ले रहा है।”

बता दें, उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में महिला श्रम भागीदारी दर (Female Labour Force Participation Rate) बढ़कर 34.1 प्रतिशत हो गया है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। यह बदलाव महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और सामाजिक सोच में आ रहे सकारात्मक परिवर्तन को दर्शाता है।

भट ने कहा कि सरकार की रोजगार योजनाओं का भी बड़ा असर पड़ा है। पिछले पांच वर्षों में विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से 5 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है, जिससे उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिली है।

उन्होंने मिशन शक्ति जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया, जिसके तहत महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। मिशन शक्ति के ‘संबल’ और ‘सामर्थ्य’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों महिलाओं को कानूनी सहायता, वित्तीय साक्षरता और कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है।

वहीं, दरक्शां हसन भट ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और महिला हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। वहीं सामर्थ्य कार्यक्रम के तहत 11.6 लाख से अधिक महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक सहायता का लाभ मिला है।

उन्होंने यह भी बताया कि स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में 7 लाख से अधिक महिलाएं माइक्रो-क्रेडिट और बाजार से जुड़ाव के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही हैं।

सामाजिक संकेतकों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं के कारण जम्मू-कश्मीर में लिंगानुपात 2011 में 918 से बढ़कर 2019 में 942 हो गया है।

भट ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद महिलाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कानून—जैसे घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण कानून—पूरी तरह लागू किए गए हैं, जिससे महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिली है।

उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद की चुनौतियों के बावजूद जम्मू-कश्मीर विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार शिक्षा, रोजगार और शासन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी क्षेत्र के लिए एक नया और आशावादी भविष्य तैयार कर रही है।

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