
आवश्यकता आविष्कार की जननी है, ये इन दिनों देश में सिलेंडर की कमी के बाद खाना बनाने के लिए नए तरीके सामने आ रहे है। कई बार गैस सिलेंडर खत्म होने के बाद नया सिलेंडर मिलने में समय लग जाता है। ऐसे में रसोई का काम प्रभावित हो सकता है। इस स्थिति में सोलर कुकर यानी धूप से चलने वाला कुकर एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। एक बार खरीदने के बाद यह कई वर्षों तक इस्तेमाल किया जा सकता है और इसमें खाना बनाने के लिए न गैस की जरूरत होती है और न ही बिजली की।
कैसे काम करता है सोलर कुकर
सोलर कुकर में खास प्रकार के रिफ्लेक्टर (प्रतिबिंबित प्लेट) लगे होते हैं, जो सूरज की रोशनी को एक जगह केंद्रित कर देते हैं। इससे कुकर के अंदर गर्मी पैदा होती है और खाना पकने लगता है। कुकर के अंदर काले रंग की सतह होती है, जो गर्मी को ज्यादा देर तक बनाए रखती है। ऊपर लगा कांच या ढक्कन गर्मी को बाहर निकलने से रोकता है। इस प्रक्रिया से कुकर के अंदर का तापमान लगभग 150 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
सोलर कुकर के फायदे
सोलर कुकर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलता है। इससे गैस और बिजली दोनों की बचत होती है। इसमें खाना धीरे-धीरे पकता है, जिससे भोजन के पोषक तत्व भी काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा इसमें न करंट लगने का खतरा होता है और न ही गैस सिलेंडर फटने का डर। सोलर कुकर में बहुत ज्यादा पार्ट्स नहीं होते, इसलिए यह जल्दी खराब भी नहीं होता और लंबे समय तक काम करता है।
कहां और कितने में खरीद सकते हैं
सोलर कुकर को आप ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स या स्थानीय बाजार से खरीद सकते हैं। छोटे परिवार के लिए उपयुक्त सोलर कुकर आमतौर पर 2000 से 5000 रुपये के बीच आसानी से मिल जाते हैं। बड़े आकार के कुकर की कीमत इससे ज्यादा हो सकती है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार अक्षय ऊर्जा योजनाओं के तहत सोलर कुकर खरीदने पर सब्सिडी भी देती है। इसके लिए लोग अपने क्षेत्र के अक्षय ऊर्जा कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।









