ईरान-सऊदी विदेश मंत्रियों की अहम बातचीत, इलाके में तनाव कम करने पर जोर…

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने इलाके में तनाव कम करने और सुरक्षा व स्थिरता बहाल करने के तरीकों पर चर्चा की।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान को फ़ोन किया और दोनों ने इलाके में तनाव कम करने और सुरक्षा तथा स्थिरता बहाल करने के तरीकों पर चर्चा की। सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह बातचीत ताज़ा घटनाक्रम के रिव्यू और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए दोनों देशों के प्रयासों पर केंद्रित रही।

बता दें, सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा, “हिज़ हाइनेस प्रिंस फैसल बिन फरहान बिन अब्दुल्ला, विदेश मंत्री, को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का फ़ोन आया। कॉल के दौरान, दोनों नेताओं ने ताज़ा घटनाक्रम का रिव्यू किया और इलाके में सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने के लिए तनाव कम करने के तरीकों पर चर्चा की।”

वहीं, विदेशी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह फोन कॉल उन रिपोर्टों के बाद हुई है जिनमें कहा गया था कि ईरान और अमेरिका के दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद उनके इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमले हुए। यह दोनों नेताओं के बीच सीज़फ़ायर के ऐलान के बाद पहली बातचीत थी।

इससे पहले 8 अप्रैल को यूरोपियन कमीशन की वाइस-प्रेसिडेंट काजा कैलास ने सऊदी विदेश मंत्री और GCC सेक्रेटरी-जनरल जसीम अल-बुदैवी से वार्ता की थी। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दो हफ़्तों के लिए घोषित संघर्ष विराम के दौरान कोई अतिरिक्त लड़ाई या रुकावट न हो।

विदेशी मीडिया ने यह भी बताया कि ईरान के सरकारी टेलीविज़न ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की पुष्टि की और बताया कि ये हमले बुधवार को ईरान के तेल ठिकानों पर हुई बमबारी का जवाब थे। सऊदी अरब के डिफ़ेंस मिनिस्ट्री ने X पर एक पोस्ट में कहा कि “पिछले कुछ घंटों में नौ ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया और गिरा दिया गया।”

इससे पहले, 7 अप्रैल को ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों ने सऊदी अरब के जुबैल में एक इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स के पास हमला किया, जिससे बड़ी आग लग गई। सऊदी अरब के डिफ़ेंस मिनिस्ट्री ने बताया कि मंगलवार को सात बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया, जिनका मलबा पूरब के एनर्जी ठिकानों के पास गिरा।

यह बातचीत दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव कम करने और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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