
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहाँ एक 22 साल की महिला अपनी छठी (6वीं) गर्भावस्था के इलाज के लिए अस्पताल पहुँची, जिसे देख डॉक्टर भी हैरान रह गए। लगातार गर्भधारण करने की वजह से महिला की सेहत बेहद नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, जाँच में महिला का हीमोग्लोबिन स्तर (खून की मात्रा) खतरनाक रूप से कम पाया गया है, जिससे उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
बताया जा रही है कि पीड़िता की शादी महज 15 वर्ष की कम उम्र में (बाल विवाह) कर दी गई थी। इसके बाद से वह लगभग हर साल एक बच्चे को जन्म दे रही है। इस पूरे मामले को लेकर इलाज करने वाले डॉक्टर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में डॉक्टर ने देश में आज भी जारी बाल विवाह की कुप्रथा और ‘बेटे की चाहत’ की रूढ़िवादी मानसिकता पर तीखे सवाल उठाए हैं।
डॉक्टर ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि वंश बढ़ाने या बेटे की लालसा में एक मासूम महिला के शरीर को इस कदर प्रताड़ित करना कानूनी और मानवीय रूप से पूरी तरह गलत है। लगातार गर्भधारण से महिला का शरीर पूरी तरह कमजोर हो चुका है। यह मामला सोशल मीडिया पर आने के बाद से बाल अधिकारों और महिला स्वास्थ्य को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। लोग इस कुप्रथा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।









