
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर 9वें इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए पोर्ट लुइस पहुंच गए हैं। यह दौरा भारत और मॉरीशस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उनके आगमन पर मॉरीशस के विदेश मामलों, क्षेत्रीय एकीकरण और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री धनंजय रामफुल ने उनका स्वागत किया। जयशंकर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर “बोनज़ोर मोरिस” लिखते हुए अपने दौरे की जानकारी साझा की और स्वागत के लिए आभार जताया।
बता दें, इस दौरे के दौरान जयशंकर कई उच्चस्तरीय बैठकों में भाग लेंगे, जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि वह भारत और मॉरिशस के बीच “एन्हांस्ड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” को आगे बढ़ाने के लिए सार्थक बातचीत की उम्मीद कर रहे हैं।
यह चार दिवसीय दौरा भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और ‘महासागर’ विजन के तहत किया जा रहा है। ‘महासागर’ यानी “क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति” की अवधारणा को पहले नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस दौरे के दौरान पेश किया था।
बता दें, विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर इस दौरान मॉरीशस के नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे। इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस को समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।
मॉरीशस दौरे के बाद जयशंकर अपने कार्यक्रम के दूसरे चरण में संयुक्त अरब अमीरात जाएंगे, जहां 11 से 12 अप्रैल तक वे अमीराती नेतृत्व के साथ मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी।
माना जा रहा है कि इस दौरे के जरिए भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है।









