
डेस्क : पाकिस्तान में नागरिक आज़ादी में आई कमी को लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गहरी चिंता जताई है। एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में मानवाधिकार की स्थिति एक कठिन दौर से गुजर रही है, और पाकिस्तान इस बड़ी समस्या को दर्शाता है।
रिपोर्ट में पाकिस्तान के साइबर कानूनों, एंटी-टेरर कानून और ऑनलाइन स्पीच को नियंत्रित करने वाले नियमों में हाल के बदलावों पर चिंता व्यक्त की गई है। इन बदलावों के कारण पत्रकारों, एक्टिविस्ट और राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार किया गया है। एमनेस्टी ने पाकिस्तान के 27वें अमेंडमेंट पर भी सवाल उठाया है, जिसमें न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करने का आरोप लगाया गया है। इस अमेंडमेंट से पाकिस्तान की सरकार और मिलिट्री लीडरशिप को विशेष छूट मिल गई है।
इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान सरकार असहमति को दबाने के लिए साइबर क्राइम और एंटी-टेरर कानूनों का इस्तेमाल कर रही है। इसके साथ ही, टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी द्वारा इंटरनेट शटडाउन और सर्विलांस टेक्नोलॉजी का उपयोग भी किया जा रहा है, ताकि सरकार की आलोचना को दबाया जा सके।
बलूचिस्तान और सिंध जैसे इलाकों में बलूच एक्टिविस्ट के विरोध प्रदर्शनों को दबा दिया गया, और मार्च में हुए एक प्रदर्शन में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। इसके अलावा, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है, और 9 मई 2023 की अशांति के बाद 100 से ज़्यादा पार्टी सदस्यों को दोषी ठहराया गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को भी राजनीति से प्रेरित आरोपों के तहत जेल में बंद किया है।
रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर भी चिंता जताई गई है। पाकिस्तानी पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट के तहत निशाना बनाया जा रहा है। कई पत्रकारों पर ऑनलाइन गतिविधियों के कारण ट्रैवल बैन और क्रिमिनल चार्ज भी लगाए गए हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले एक्टिविस्ट्स, जैसे इमान मज़ारी, पर भी आरोप लगाए गए हैं, जिससे सही प्रक्रिया को लेकर चिंता बढ़ गई है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट पाकिस्तान में मानवाधिकार की बिगड़ती स्थिति और सरकार की दमनकारी नीतियों की ओर इशारा करती है, जो आज़ादी की प्रक्रिया को खतरे में डाल रही है।









