
डेस्क : कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह ने हाल ही में भारतीय रुपया और उसकी गिरावट पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय रुपया स्ट्रक्चरल रूप से कमजोर हो रहा है और यह संभावना है कि वह 100-प्रति-डॉलर के स्तर को छू सकता है, लेकिन अगर यह गिरावट धीरे-धीरे और समान तरीके से होती है तो यह चिंता का कारण नहीं होना चाहिए।
न्यूज़ एजेंसी ANI को दिए एक इंटरव्यू में शाह ने कहा कि “रुपये की किस्मत में डेप्रिसिएशन होना ही है,” और इसके लिए उन्होंने उच्च महंगाई और भारत की उत्पादकता में गिरावट को जिम्मेदार ठहराया। शाह के मुताबिक, “भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी इकॉनमी होने के बावजूद, हमारी महंगाई हमारे ट्रेड पार्टनर्स की तुलना में ज्यादा है और हमारी प्रोडक्टिविटी कम है… इसलिए मेरी इकॉनमी को कॉम्पिटिटिव बने रहने के लिए, रुपये को एडजस्ट करना होगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि रुपया एक स्थिर गिरावट के साथ 7 प्रतिशत सालाना की दर से घटने के बाद अब करीब 4 प्रतिशत की दर से गिर रहा है और यह गिरावट आगे और भी कम हो सकती है। शाह के मुताबिक, “हो सकता है कि आगे चलकर यह 2 प्रतिशत हो जाए, लेकिन यह डेप्रिसिएट होगा।”
शाह ने कहा कि अगर रुपया 100-प्रति-डॉलर के स्तर को पार करता है, तो इसे एक चिंता का विषय नहीं माना जाएगा, बशर्ते यह मार्केट की खराब स्थिति की वजह से न हो, बल्कि आर्थिक सुधारों के चलते हो। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि रुपये को कृत्रिम रूप से बढ़ाने की कोशिश करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है। “अगर हम गलत तरीके से रुपया बढ़ाते हैं… तो कैपिटल देश छोड़ देगा… इकॉनमी पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी,” शाह ने चेतावनी दी।
बिज़नेस और खासकर छोटे और मीडियम एंटरप्राइजेज (SMEs) के लिए शाह ने कहा कि धीरे-धीरे होने वाली डेप्रिसिएशन से कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है, क्योंकि यह भारतीय व्यवसायों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाए रखता है। शाह ने कहा, “अगर यह आपकी कॉम्पिटिटिवनेस को ऑर्डर में बनाए रखता है, तो यह बिल्कुल ठीक है। उन्हें कुछ करने की ज़रूरत नहीं है।”









