
राज्यसभा में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय के प्रस्ताव को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही संसद के ऊपरी सदन में सत्तापक्ष का पलड़ा और भारी हो गया है, जबकि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP को संसदीय मोर्चे पर एक बड़ी हार का सामना करना पड़ा है।
BJP की बढ़ी ताकत, AAP का घटा कद
इस विलय के बाद राज्यसभा के आंकड़ों में भारी बदलाव आया है। अब भाजपा के पास सदन में सदस्यों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जो पार्टी को विधायी कार्यों और बिलों को पास कराने में और अधिक मजबूती प्रदान करेगी। दूसरी ओर, कभी राज्यसभा में मुखर रहने वाली आम आदमी पार्टी अब सिमटकर केवल 3 सांसदों तक रह गई है। यह बदलाव विपक्षी एकता और AAP की रणनीति के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
अयोग्यता की मांग हुई खारिज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आम आदमी पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया था। पार्टी ने रविवार को ही राज्यसभा सभापति को एक औपचारिक पत्र लिखकर इन सातों सांसदों के खिलाफ ‘दल-बदल विरोधी कानून’ (Anti-Defection Law) के तहत कार्रवाई करने की मांग की थी। AAP का तर्क था कि इन सांसदों ने पार्टी की सदस्यता और जनादेश का अपमान किया है, इसलिए इन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। हालांकि, सभापति ने कानूनी बारीकियों और विलय की शर्तों को ध्यान में रखते हुए इस विरोध को दरकिनार कर दिया और विलय को वैध करार दिया।









