
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सुपरपावर अमेरिका के लिए एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पेंटागन से लेकर व्हाइट हाउस तक खलबली मचा दी है। एक हालिया खुफिया रिपोर्ट (NBC न्यूज के हवाले से) में दावा किया गया है कि ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को उम्मीद से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचा है। यह नुकसान इतना गहरा है कि इसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की परिचालन क्षमता (Operational Capability) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
THAAD का स्टॉक खत्म, रक्षा कवच हुआ कमजोर
रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले आंकड़ों में से एक अमेरिका की मिसाइल रक्षा प्रणाली से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने दुनिया भर में तैनात अपनी अत्याधुनिक THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) मिसाइलों का लगभग 40 प्रतिशत स्टॉक खर्च कर दिया है। विडंबना यह है कि इन मिसाइलों को बनाने में सालों का वक्त लगता है, जबकि युद्ध की स्थिति में ये कुछ ही दिनों में खत्म हो रही हैं। इससे यह साफ है कि एक लंबे खिंचने वाले युद्ध में अमेरिका की ‘डिफेंस लाइन’ ढह सकती है।
ईरान की ‘लो-कॉस्ट’ रणनीति के आगे बेबस ‘सुपरपावर’
ईरान ने इस युद्ध में बेहद सस्ती लेकिन मारक तकनीक का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां अमेरिका अपनी महंगी मिसाइलें गंवा रहा है, वहीं ईरान सस्ते ड्रोन और सटीक मिसाइलों से वार कर रहा है। 28 फरवरी के बाद से हुए हमलों में सात देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
हुए नुकसान का विवरण:
- महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर: सैन्य गोदाम, कमांड सेंटर और एयरक्राफ्ट हैंगर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
- कम्युनिकेशन ब्लॉक: सैटेलाइट संचार प्रणाली और रडार सिस्टम को क्षति पहुंची है, जिससे निगरानी तंत्र कमजोर हुआ है।
- हवाई पट्टी: रनवे और कई सैन्य विमानों के क्षतिग्रस्त होने से विमानों की उड़ान पर असर पड़ा है।
- एक हैरान करने वाली घटना में, ईरान का एक पुराना F-5 लड़ाकू विमान अमेरिका के अत्याधुनिक सुरक्षा घेरे को भेदकर हमला करने में सफल रहा, जिसने अमेरिकी एयर डिफेंस की कमियों को उजागर कर दिया है।
खर्च का बढ़ता बोझ और ट्रंप की मुश्किलें
इस सैन्य टकराव ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ डाल दिया है। पेंटागन ने इस संघर्ष की भरपाई के लिए 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। गौर करने वाली बात यह है कि युद्ध के पहले ही हफ्ते में करीब 11 अरब डॉलर स्वाहा हो चुके थे।
इधर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घरेलू मोर्चे पर घिरते नजर आ रहे हैं। रिपब्लिकन सांसदों ने पारदर्शिता की कमी पर नाराजगी जताई है। सांसदों का कहना है कि जब सरकार 1.5 ट्रिलियन डॉलर (पिछले साल से 50% अधिक) के रिकॉर्ड रक्षा बजट की मांग कर रही है, तो उन्हें नुकसान की सही जानकारी क्यों नहीं दी जा रही?









