बलूच महिलाओं की सुरक्षा के लिए BWF की UN से कार्रवाई की अपील, पाकिस्तान पर लगाए गंभीर आरोप…

बलूच महिला फोरम ने यूनाइटेड नेशंस और मानवाधिकार संस्थाओं से बलूचिस्तान में महिलाओं के जबरन गायब होने के मामलों पर दखल की अपील की है। खादिजा बलूच, हसीना नूर बख्श और गुल बानुक ताज जैसे मामले इस अपील का हिस्सा हैं।

बलूच महिला फोरम (BWF) ने अपने लेटर के जरिए इंटरनेशनल मानवाधिकार संगठनों और यूनाइटेड नेशंस से बलूचिस्तान में महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन पर गंभीर दखल देने की मांग की है। फोरम ने विशेष रूप से बलूच महिलाओं के जबरन गायब होने के मामलों को लेकर आवाज़ उठाई, जिसमें खादिजा बलूच, हसीना नूर बख्श और गुल बानुक ताज जैसे मामले शामिल हैं।

बता दें, BWF ने कहा कि बलूच महिलाओं को सरकार से जुड़े लोगों द्वारा कथित तौर पर गायब किया जा रहा है और यह एक सिस्टमैटिक तरीके से टारगेट करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। फोरम ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया कि यह महिलाओं के खिलाफ अत्याचार का एक हिस्सा है और यह अत्याचारें लंबे समय से जारी हैं।

क्वेटा के बोलन मेडिकल कॉलेज की नर्सिंग छात्रा खादिजा बलूच का मामला इस समय खास चर्चा में है। उसे कथित तौर पर उसके हॉस्टल से जबरदस्ती उठा लिया गया था। इसी तरह, हसीना नूर बख्श, जो कराची की एक हाउसवाइफ हैं, को उनके घर से जबरन गायब कर दिया गया। इसके अलावा, गुल बानुक ताज का मामला भी सामने आया है, जो केच के सिंगाबाद तेजाबन की हाउसवाइफ थीं। उन्हें उनके घर से किडनैप किया गया था और इसके बावजूद उनके परिवार को कोई जानकारी नहीं दी गई।

BWF का कहना है कि इन घटनाओं के पीछे पाकिस्तान सरकार की मंज़ूरी वाली स्ट्रैटेजी का हाथ हो सकता है, जिससे बलूच महिलाओं को डर और दबाव में लाकर उनकी आवाज़ को दबाया जा रहा है।

फोरम ने कहा कि इन घटनाओं से यह साबित होता है कि बलूच महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और उन्हें बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने UN, ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल, और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से अपील की है कि वे इन मामलों की तुरंत जांच करें और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराएं।

BWF ने बलूच महिलाओं के खिलाफ हो रहे इस अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ तुरंत कदम उठाने की अपील की है और कहा कि दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों का दखल इस मामले में आवश्यक है। यह कदम न केवल बलूच महिलाओं के न्याय की दिशा में होगा, बल्कि पाकिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर भी एक सख्त संदेश जाएगा।

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