
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंगलवार को देहरादून में आयोजित ‘महिला आक्रोश मशाल रैली’ में शामिल हुए। यह रैली गांधी पार्क से घंटाघर तक आयोजित की गई, जिसमें हजारों महिलाओं ने महिला आरक्षण बिल की नाकामी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। रैली में माताओं, बहनों और बेटियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई, यह साफ़ संकेत था कि महिलाएं अब अपने अधिकारों को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक और मुखर हो चुकी हैं।
बता दें, मुख्यमंत्री धामी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि यह मशाल मार्च केवल एक प्रतीकात्मक घटना नहीं है, बल्कि यह उन ताकतों के खिलाफ जनता के गुस्से का इज़हार है, जो महिलाओं के अधिकारों में रुकावट डालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि न सिर्फ़ राज्य, बल्कि पूरे देश की महिलाएं अब अपनी इज़्ज़त और सही प्रतिनिधित्व के लिए एकजुट हो रही हैं।
धामी ने यह भी बताया कि महिला आरक्षण का मुद्दा वर्षों से लंबित रहा है, लेकिन हाल की कोशिशों ने इसे आगे बढ़ाया है। हालांकि, राजनीतिक स्वार्थों ने इस पहल को बाधित किया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल महिला सशक्तिकरण को कभी गंभीरता से नहीं लेते, बल्कि इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज की भारतीय महिला अब सिर्फ़ देखने वाली नहीं, बल्कि फैसले लेने वाली है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं की सराहना की और कहा कि अब ये योजनाएं कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीनी स्तर पर लागू हो रही हैं।









