
पटना : देश के सबसे चर्चित और लोकप्रिय शिक्षक ‘खान सर’ उर्फ फैसल खान इन दिनों अपने पटना स्थित कोचिंग संस्थान पर हुए अचानक हमले और गोलीबारी के मामले को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। इस गंभीर मामले में पुलिसिया कार्रवाई की आशंका और गिरफ्तारी की लटकती तलवार के बीच, बिहार के कानूनी गलियारों से एक नाम अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है—सीनियर अधिवक्ता अरविंद कुमार मव्वार। अदालत के भीतर उनकी अचूक और दमदार कानूनी रणनीति ने पूरे मामले का रुख ही बदल दिया और खान सर को एक बहुत बड़ी राहत दिलाने में कामयाबी हासिल की।
पूरा मामला बीते 2 जून का है, जब पटना स्थित ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ संस्थान पर असामाजिक तत्वों द्वारा हमला किया गया और उसके बाद वहां अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस घटना के बाद दर्ज हुई एफआईआर (FIR) ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया था। विरोधी पक्ष की ओर से अदालत में इसे जानबूझकर की गई इरादतन गोलीबारी का रूप देने की कोशिश की गई और खान सर की अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध किया गया। ऐसे बेहद नाजुक और चुनौतीपूर्ण समय में वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार मव्वार ने कोर्ट के सामने खान सर का पक्ष बेहद मजबूती और तर्कों के साथ रखा, जिसके बाद अदालत ने खान सर की गिरफ्तारी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
20 साल का अनुभव और क्रिमिनल केस के माहिर खिलाड़ी
इस हाई-प्रोफाइल केस के बाद अरविंद कुमार मव्वार राष्ट्रीय मीडिया और कानूनी बिरादरी में चर्चा का विषय बन गए हैं। अरविंद कुमार मव्वार पिछले दो दशकों (20 साल) से भी अधिक समय से पटना सिविल कोर्ट और पटना हाई कोर्ट में लगातार वकालत कर रहे हैं। उन्हें दीवानी (Civil) और विशेषकर आपराधिक (Criminal) मामलों की बेहद गहरी और बारीक समझ है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, मुश्किल से मुश्किल क्रिमिनल केस में जमानत याचिकाओं की ड्राफ्टिंग, गवाहों से तीखी जिरह और कोर्टरूम में तथ्यों को बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश करना मव्वार की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। खान सर के इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिहार की क्रिमिनल लॉ प्रैक्टिस में अरविंद कुमार मव्वार का नाम क्यों इतने सम्मान और प्रमुखता के साथ लिया जाता है। इस अदालती राहत के बाद खान सर के लाखों प्रशंसकों और छात्रों ने भी राहत की सांस ली है।









