
गढ़मुक्तेश्वर (हापुड़) : उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित पवित्र तीर्थ स्थल गढ़मुक्तेश्वर के गंगा खादर क्षेत्र में अवैध बालू (रेत) खनन का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सख्त पाबंदियों और प्रशासन द्वारा निगरानी के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, खनन माफिया पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाते हुए रात-दिन गंगा की छाती चीरकर बालू निकाल रहे हैं। स्थिति यह है कि नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम बालू का अवैध खनन और परिवहन किया जा रहा है, और संबंधित जिम्मेदार विभाग इस पर प्रभावी अंकुश लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि खादर क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए खनन विभाग और स्थानीय पुलिस-प्रशासन समय-समय पर अभियान चलाने और छापेमारी की कागजी कार्रवाई का दावा तो करते हैं, लेकिन धरातल पर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता। प्रशासनिक ढील का फायदा उठाकर खनन माफिया ने अब एक नया पैंतरा अपना लिया है।
बुग्गियों से हो रहा भंडारण, फिर ट्रैक्टरों से बाजारों में सप्लाई
कार्रवाई से बचने के लिए खनन माफिया सीधे बड़े वाहनों को नदी किनारे नहीं ले जा रहे हैं। इसके बजाय, दिन और रात के उजाले-अंधेरे का फायदा उठाकर पहले घोड़ों और भैंसा बुग्गियों के माध्यम से गंगा किनारे से रेत निकाली जाती है। इस रेत को चुपचाप खादर के गांवों में स्थित घरों और अन्य सुनसान ठिकानों पर डंप (भंडारण) कर लिया जाता है। इसके बाद मौका देखकर इस अवैध रेत को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, कैंटरों और अन्य डंपर वाहनों में लोड करके आसपास के शहरों और विभिन्न निर्माण बाजारों में मोटी रकम पर सप्लाई किया जा रहा है।
इस अवैध कारोबार से जहां सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है, वहीं गंगा का प्राकृतिक स्वरूप और खादर क्षेत्र का इकोसिस्टम भी पूरी तरह तबाह हो रहा है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और शासन स्तर से इस सिंडिकेट के खिलाफ तत्काल कठोर गैंगस्टर एक्ट और सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।









