गंगा एक्सप्रेसवे पर क्यों नहीं बढ़ रही भारी वाहनों की रफ्तार? हापुड़ जंक्शन की अधूरी इंटरचेंज व्यवस्था बनी बड़ी बाधा

उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी और ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ (Ganga Expressway) को लेकर एक बड़ी तकनीकी और संरचनात्मक चुनौती सामने आई है। लगभग 600 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़कर राज्य के औद्योगिक, व्यापारिक और लॉजिस्टिक्स विकास का नया इंजन बनने के लिए तैयार है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि इसके एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रवेश बिंदु पर तकनीकी खामियों के कारण भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पा रही है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों का साफ कहना है कि हापुड़ स्थित नेशनल हाईवे 9 (NH-9) और गंगा एक्सप्रेसवे के जंक्शन पर बनी अधूरी इंटरचेंज व्यवस्था इस पूरे प्रोजेक्ट की पूर्ण क्षमता के उपयोग में बड़ी बाधा बन रही है।

अंडरपास की कम ऊंचाई और संकरा मोड़ बनी मुसीबत

परिवहन कारोबारियों के अनुसार, दिल्ली और हापुड़ की दिशा से प्रयागराज जाने वाले भारी मालवाहक वाहनों को गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए एनएच-9 की सर्विस रोड और वाहन अंडरपास (VUP) का सहारा लेना पड़ता है। वर्तमान व्यवस्था में भारी वाहनों के लिए कोई अलग या पर्याप्त क्षमता वाला डायरेक्ट इंटरचेंज उपलब्ध नहीं है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब 15 मीटर से अधिक लंबाई वाले मल्टी-एक्सल (Multi-Axle) ट्रक इस संकरे अंडरपास से गुजरते हैं। कम टर्निंग रेडियस (मोड़ने की जगह) के कारण चालकों को ट्रकों को आगे-पीछे कर कई बार में मोड़ना पड़ता है, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती है बल्कि नेशनल हाईवे पर दुर्घटनाओं का जोखिम भी कई गुना बढ़ जाता है।

लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए इससे भी बड़ी चिंता अंडरपास की वर्टिकल क्लियरेंस यानी ऊंचाई की सीमा है। इस वाहन अंडरपास की अधिकतम ऊंचाई केवल 5.5 मीटर है। इसके कारण देश की बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, ऊर्जा और औद्योगिक इकाइयों में उपयोग होने वाले भारी व ऊंचे उपकरण ले जाने वाले ओवर डायमेंशनल कार्गो (ODC) वाहन यहाँ से नहीं गुजर पाते हैं। सुगम प्रवेश और निकास व्यवस्था न होने के कारण देश के बड़े ट्रांसपोर्टर्स अब गंगा एक्सप्रेसवे के बजाय पुराने वैकल्पिक मार्गों का चयन करने को मजबूर हैं। इसका सीधा नुकसान एक्सप्रेसवे के यातायात घनत्व (Traffic Density) और सरकार के टोल संग्रह (Toll Collection) पर पड़ रहा है।

एसोसिएशन ने उठाई पूर्ण विकसित इंटरचेंज की मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में जिस तेजी से औद्योगिक निवेश, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स पार्क का विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए वर्तमान सर्विस रोड और अंडरपास की व्यवस्था पूरी तरह नाकाफी है। ‘द यूपी मोटर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन’ के प्रदेश महामंत्री सर्वेन्द्र वर्मा ने इस गंभीर समस्या को लेकर जिलाधिकारी (DM) हापुड़ को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है। पत्र में उन्होंने जनहित और प्रदेश के आर्थिक विकास का हवाला देते हुए मांग की है कि गंगा एक्सप्रेसवे और एनएच-9 के जंक्शन पर शीघ्र से शीघ्र एक पूर्ण विकसित, बहुदिशीय (Multi-directional) और उच्च क्षमता वाले आधुनिक इंटरचेंज का निर्माण कराया जाए। यदि समय रहते इस जंक्शन का ढांचागत सुधार नहीं किया गया, तो माल परिवहन की दक्षता पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

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