बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पशु तस्करी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक चाबुक चला है। पशु तस्करी (Cattle Smuggling) में शुरुआती तौर पर संलिप्तता और तस्करों की मदद करने की आशंका को देखते हुए बलिया के पुलिस अधीक्षक (SP) ओमवीर सिंह ने शनिवार को त्वरित कार्रवाई करते हुए छह पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के साथ ही सभी आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी बैठा दी गई है।
निलंबित होने वाले पुलिसकर्मियों में दो अलग-अलग थानों के स्टाफ शामिल हैं:
- कोतवाली थाना: मुकेश कुमार, रिंकू गुप्ता और अमन सिंह।
- दुबहर थाना: मनोज कुमार, दिनेश विश्वकर्मा और आलोक।
एसओजी और फेफना पुलिस की छापेमारी में हुआ था खुलासा:
इस पूरे मामले की जड़ें करीब 10 दिन पहले की एक बड़ी कार्रवाई से जुड़ी हैं। गत बुधवार को फेफना थाना पुलिस और स्वात (SOG) टीम ने संयुक्त रूप से जाल बिछाकर एक अंतरराज्यीय गो-तस्करी नेटवर्क का राजफाश किया था। पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के निर्देशन में एसओजी टीम को पुख्ता सूचना मिली थी कि अलावलपुर चट्टी से वयना-सागरपाली मार्ग की तरफ छह संदिग्ध वाहन बेहद तेज रफ्तार से जा रहे हैं, जिनमें क्रूरतापूर्वक गोवंशीय पशुओं को लादकर तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी की और सभी छह वाहनों को अपने कब्जे में ले लिया।
तलाशी के दौरान वाहनों से 17 गाय और 9 बछड़ा-बछिया सहित कुल 26 गोवंशीय पशुओं को बेहद दयनीय स्थिति में बरामद किया गया। मौके से पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों—शनि अंसारी (निवासी बयासी, थाना दुबहड़), रिकीत कुमार उर्फ रितिक (निवासी कोट अजोरपुर, थाना नरही) और एक बाल अपचारी (किशोरी) को हिरासत में लिया था।
पूछताछ में तस्करों ने उगले खाकी के नाम:
पुलिस की गिरफ्त में आए तस्करों से जब कड़ाई से प्रारंभिक पूछताछ की गई, तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि इस अवैध कारोबार को सुरक्षित रास्ता देने में स्थानीय पुलिस के कुछ हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल उनकी मदद करते थे। तस्करों के इस कुबूलनामे को एसपी ओमवीर सिंह ने अत्यंत गंभीरता से लिया। खाकी पर लगे इस दाग को साफ करने के लिए उन्होंने बिना देर किए इन छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया। एसपी का साफ कहना है कि विभागीय जांच की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद इन सभी के खिलाफ बर्खास्तगी या एफआईआर (FIR) जैसी आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।









