
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह ने विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार द्वारा जांच अधिकारी को लिखे गए पत्र पर कड़ा ऐतराज जताते हुए तीखा पलटवार किया है। रविवार को पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान संजय सिंह ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि आलोक कुमार राम मंदिर के चढ़ावा चोरों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और उनके इस कदम के पीछे पूरी तरह से राजनीति छिपी हुई है।
“पत्र में राजनीति है, प्रत्यक्षदर्शियों के नाम क्यों छुपाए?”
संजय सिंह ने आलोक कुमार के पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा, “इस पत्र में स्पष्ट रूप से बेईमानी दिखती है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल, मेरा और प्रो. रामगोपाल यादव का नाम तो लिखा, लेकिन भाजपा, आरएसएस और वीएचपी के उन लोगों का नाम क्यों नहीं लिखा जिन्होंने अपनी आँखों से वहां चोरी और डकैती होते देखी है?”

संजय सिंह ने मंदिर निर्माण का कार्य देख रहे नृपेंद्र मिश्रा के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि नृपेंद्र मिश्रा ने खुद कई इंटरव्यू में माना है कि मंदिर में सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि डकैती हुई है। इसके अलावा पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार, महंत धर्मदास, कमल नयन दास और आरएसएस से जुड़े महिपाल सिंह जैसे लोगों ने भी सार्वजनिक रूप से भ्रष्टाचार और चढ़ावे में चोरी के आरोप लगाए हैं, लेकिन आलोक कुमार के पत्र में इनमें से किसी का नाम शामिल नहीं है।
जांच में शामिल होने की चुनौती और सोमवार को नया कदम
आलोक कुमार की चिट्ठी का स्वागत करते हुए संजय सिंह ने कहा कि वे एसआईटी की जांच में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा, “मैं जांच अधिकारी के पास अकेले नहीं जाऊंगा, बल्कि अपने साथ उन सभी लोगों को लेकर जाऊंगा जो दान में दी गईं प्रभु श्री राम की पदुकाएं, हार, प्राण-प्रतिष्ठित राम शिलाएं और पूर्व गृह सचिव के मुताबिक 1 किलो सोने से लिखी गई पवित्र राम चरित मानस चोरी होने का आरोप लगा रहे हैं।”
सांसद ने याद दिलाया कि उन्होंने साल 2021 में ही अयोध्या कोतवाली में तहरीर देकर 2 करोड़ की जमीन को 5 मिनट में 18.5 करोड़ में खरीदने वाले जमीन घोटाले की जांच की मांग की थी, लेकिन 5 साल तक आलोक कुमार इस पूरे मामले से अनजान बने रहे।
संजय सिंह ने एलान किया कि वे सोमवार को जांच अधिकारी को एक आधिकारिक पत्र लिखेंगे। इस पत्र में वे मांग करेंगे कि पिछले चार सालों तक ट्रस्ट में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि रहे ज्ञानेश कुमार से भी इस पूरे प्रकरण में गहन पूछताछ की जानी चाहिए, क्योंकि ये तमाम विवादित खरीद-फरोख्त उनकी जानकारी में हुई थी। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि चंपत राय ने मामले को दबाने के लिए आनन-फानन में पूरा राम फकीर मंदिर ही तुड़वा दिया है, जिसकी वे विस्तृत जानकारी जुटा रहे हैं।









