राम मंदिर में करोड़ों की चोरी का सच, पुलिस की सलाह को ट्रस्ट ने क्यों किया दरकिनार

अयोध्या स्थित राम मंदिर में हुए चढ़ावे की चोरी के मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।

अयोध्या स्थित राम मंदिर में हुए चढ़ावे की चोरी के मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। यह सामने आया है कि इस बड़ी चोरी को टाला जा सकता था, यदि ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिशों को गंभीरता से लिया होता।

पुलिस की चेतावनी और ट्रस्ट की अनदेखी

सूत्रों के अनुसार, स्थानीय पुलिस ने राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, विशेष रूप से चंपत राय और अनिल मिश्रा को कई बार औपचारिक सलाह दी थी। पुलिस का सुझाव था कि:

  • मंदिर परिसर में एआई (AI) आधारित सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल किए जाएं।
  • कुछ अत्यधिक संवेदनशील (Sensitive) चिन्हित स्थानों पर पुलिस की दखल और तैनाती बढ़ाई जाए।

दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इन सुरक्षा संबंधी सिफारिशों पर कोई ध्यान नहीं दिया और उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। इसी लापरवाही का नतीजा करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी के रूप में सामने आया है।

सुरक्षा का घेरा और ‘कमजोर कड़ी’

राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था देश के सबसे मजबूत सुरक्षा घेरों में से एक है। यहाँ सुरक्षा के लिए:

  • सीआरपीएफ (CRPF), एसएसएफ (SSF), पीएसी (PAC) और स्थानीय पुलिस के साथ निजी सुरक्षाकर्मी भी तैनात हैं।
  • सुरक्षा में कुल ढाई हजार से अधिक जवान तैनात हैं।
  • एटीएस (ATS) की एक टीम स्थायी रूप से परिसर में मौजूद रहती है।

इतनी भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद, पुलिस अधिकारियों ने कुछ ऐसे स्थान चिह्नित किए थे जो सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील थे। खबरों के मुताबिक, उन विशिष्ट संवेदनशील स्थानों पर ट्रस्ट ने पुलिस की तैनाती करने की अनुमति नहीं दी, जो अंततः सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी खामी साबित हुई।

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