दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव मारपीट मामला: एडीजी और एसएसपी के अलग-अलग बयानों से घिरी पुलिस कार्यप्रणाली, उठे गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एसएसपी कार्यालय के भीतर दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ कथित तौर पर थर्ड डिग्री टॉर्चर और मारपीट मामले में खुद पुलिस अधिकारियों के बयान एक-दूसरे से पूरी तरह उलट नजर आ रहे हैं। इस विरोधाभास के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में ADG और SSP के बयानों में जमीन-आसमान का अंतर है। जहां एक ओर एडीजी (ADG) ने यह स्वीकार किया है कि एसएसपी कार्यालय में वाद-विवाद और हंगामे के दौरान हिंसा हुई थी, वहीं दूसरी ओर मेरठ के एसएसपी (SSP) का दावा है कि कार्यालय परिसर के भीतर ऐसी कोई हिंसा नहीं हुई थी। एसएसपी के अनुसार, दोनों युवक (दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव) स्कूटी से फिसलकर घायल हुए थे।

एक ही मामले में पुलिस के दो शीर्ष अधिकारियों के अलग-अलग बयान सामने आने के बाद सियासी गलियारों और स्थानीय लोगों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। विपक्ष और पीड़ित पक्ष इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सच क्या है और पुलिस प्रशासन इस मामले में पर्दा डालने की कोशिश क्यों कर रहा है। इस तीखे विरोधाभास के सामने आने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि शासन स्तर पर इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है और सच्चाई को सामने लाने के लिए किस तरह की जांच बैठाई जाती है।

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