
राज्यसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. ऐसे में तमाम पार्टियां जोर-आजमाइश में जुटी हुई है. तमाम राजनीतिक दल इस कवायद में जुटे हुए हैं कि किस नेता को राज्यसभा भेजा जाए. ऐसे में उत्तर प्रदेश से भी राज्यसभा सांसद बनने के लिए तमाम राजनैतिक दिग्गज जोर आजमाइश में जुटे हुए हैं.
राज्यसभा चुनावों को लेकर मंथनों का दौर जारी है और इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी नेताओं से सलाह मशविरा कर रहे हैं कि कौन से चेहरे को राज्यसभा भेजा जाए. सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी की राजनीति जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है.
ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि राज्यसभा सांसद का चेहरा चुनने के लिए भी अखिलेश यादव जातिगत समीकरणों को साधने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ने वाले हैं. फिलहाल, समाजवादी पार्टी के पास 112 एमएलए (MLA) हैं और अगर सहयोगी दलों के विधायकों को भी जोड़ दें तो यह संख्या 125 तक पहुंचती है.
किसी दल का एक सांसद होने के लिए उसके समर्थन में 37 विधायक होने चाहिए. हाथ से समाजवादी पार्टी अपने किन्हीं 3 नेताओं को राज्यसभा भेज सकती है. आरएलडी चाहती है कि उनके नेता जयंत चौधरी को राज्यसभा भेजा जाए.
फिर सवाल यह पैदा होता है कि 2024 केंद्रीय चुनाव में यूपी के बागपत संसदीय सीट से केंद्रीय चुनाव में कौन खड़ा होगा? यह भी आशंका जताई जा रही है कि अगर जयंत चौधरी से राज्यसभा चले जाते हैं तो जनता के बीच यह संदेश भी जा सकता है कि चुनाव ना जीत पाने के डर से जयंत ने ऐसा फैसला लिया होगा.
बहरहाल, यह कयास लगाए जा रहे हैं कि समाजवादी पार्टी राज्यसभा सांसद के रूप में किसी मुस्लिम चेहरे पर दांव लगा सकती है, जिसमें कपिल सिब्बल का नाम आगे चल रहा है जबकि हाल ही में कांग्रेस से बगावत करके सपा में शामिल हुए सलीम शेरवानी का नाम दूसरे नंबर पर चल रहा है.
वहीं, पूर्व राज्यसभा सांसद जावेद अली खान को भी तीसरे नंबर पर सपा का दिग्गज मुस्लिम चेहरा माना जा रहा है. कयासों के इन्हीं सिलसिलों के बीच डिंपल यादव की भी एंट्री हो सकती है. अब देखना है कि सपा प्रमुख के राजनैतिक मंथन से क्या रणनीति निकलकर सामने आती है.









