पेंशन को लेकर SC कोर्ट का अहम फैसला, नियोक्ताओं द्वारा की गई गलतियों के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नहीं बनाया जा सकता पीड़ित

इस मामले में एक पेंशनभोगी जो कलकत्ता राज्य परिवहन निगम के कंडक्टर के रूप में सेवानिवृत्त हुए को इस आधार पर पेंशन से वंचित कर दिया गया

पेंशन भोगियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। पेंशनरों के अधिकारों की पुष्टि करते हुए एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके नियोक्ताओं द्वारा की गई गलतियों के कारण पीड़ित नहीं बनाया जा सकता है।

इस मामले में एक पेंशनभोगी जो कलकत्ता राज्य परिवहन निगम के कंडक्टर के रूप में सेवानिवृत्त हुए को इस आधार पर पेंशन से वंचित कर दिया गया कि उन्होंने नए पेंशन नियमों के तहत पेंशन के विकल्प का प्रयोग नहीं किया। निगम ने तर्क दिया कि कर्मचारी पुरानी अंशदायी भविष्य निधि योजना द्वारा शासित था और उसके पूरे करियर के दौरान उसके वेतन से कटौती की जाती रही।

हालांकि, न्यायालय ने पाया कि निगम पेंशन विनियमों के तहत पेंशन प्राप्त करने के लिए कर्मचारी द्वारा प्रयोग किए गए विकल्प पर कार्रवाई करने में विफल रहा। यह तथ्य कि उनके वेतन से कटौती जारी है, उनके दावों को नकारने का आधार नहीं है। ये कटौतियां गलत थीं क्योंकि ये कर्मचारी द्वारा दिए गए विकल्प की अवहेलना कर की गई थीं।

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